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भारतीय रेल : सिमुलतला-कोडरमा-कटोरिया रेल लाइन : क्या सच होगा दशकों पुराना सपना?, मिला यह जवाब

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Indian Railways: Simulthala-Koderma-Katoria rail line पर चर्चा



संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। बिहार का ‘मिनी शिमला’ कहलाने वाला सिमुलतला जो कभी अपनी सुहावनी वादियों और आबो-हवा के लिए देशभर में चर्चित था, आज विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए तरस रहा है। 27 दिसंबर को जसीडीह-किउल रेलखंड पर हुई भीषण मालगाड़ी दुर्घटना ने न केवल रेलवे पटरियों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि रेलवे नेटवर्क की उस कमजोर कड़ी को भी उजागर कर दिया, जिसे दशकों से नजरअंदाज किया जा रहा था। इस हादसे के बाद करीब 75 घंटे तक ट्रेनों का परिचालन ठप रहा। उस दौरान सिमुलतला, चकाई और कटोरिया क्षेत्र से एक ही आवाज उठी, अब और नहीं, हमें विकल्प चाहिए, हमें विकास चाहिए। इस घटना के बाद क्षेत्र में प्रस्तावित सिमुलतला-कोडरमा और सिमुलतला-कटोरिया नई रेल लाइनों की मांग ने जोर पकड़ लिया है।
27 दिसंबर की वह काली रात और 75 घंटे का सन्नाटा

जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि ये रेल लाइनें केवल आवागमन का साधन नहीं होंगी, बल्कि पिछड़ेपन के अंधेरे में रह रहे लाखों लोगों के लिए विकास की संजीवनी साबित होंगी। यदि भविष्य में 27 दिसंबर जैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न होती है तो ये वैकल्पिक रेल मार्ग रेलवे के लिए जीवनरेखा का काम करेंगे। इससे हावड़ा-नई दिल्ली मेन लाइन पर दबाव भी कम होगा और परिचालन निर्बाध रहेगा। सिमुलतला-कटोरिया रेल मार्ग हीरा-रायडीह, तेगधोवा और सत्तीघाट होते हुए कटोरिया पहुंचेगा। इससे बांका और भागलपुर जिले का सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा जो क्षेत्र में आर्थिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं, सिमुलतला-चकाई-कोडरमा रेल लाइन माधोपुर, सरौन, चकाई, असनाहा और जरुवाडीह होते हुए झारखंड के कोडरमा (ग्रैंड कार्ड) से जुड़ेगी, जिससे दो राज्यों के बीच व्यापार और आवागमन को नई गति मिलेगी।

अब सवाल यह है कि क्या दिल्ली के नीति-निर्माता सिमुलतला, चकाई और कटोरिया के इन सुदूर गांवों की धड़कनों को सुन पाएंगे? उम्मीद अब भी कायम है, क्योंकि जब मांग जनहित की हो और इरादे मजबूत हों तो विकास के रास्ते बन ही जाते हैं।


जब देश में गति शक्ति की लहर है तो हमारा क्षेत्र इससे अछूता क्यों रहे? उन्होंने सांसद से इस मांग को दिल्ली तक मजबूती से पहुंचाने की अपील की।
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मंजू देवी, मुखिया, खुरंडा


आवागमन सुगम होते ही सिमुलतला और चकाई की पर्यटन संभावनाएं देश-दुनिया के सामने आएंगी।



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रुखसाना खातून, मुखिया, कनौदी


सुदूर गांवों की स्थिति आज भी चिंताजनक है। बच्चे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यह रेल लाइन उनके सपनों को पंख देगी।



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इंदु भारती, मुखिया, टेलवा


आजादी के 75 वर्षों बाद भी जमुई और बांका जिले के कई क्षेत्र रेल मानचित्र से बाहर हैं, यह एक गहरी पीड़ा है। यह मांग हमारे अस्तित्व और स्वाभिमान से जुड़ी हुई है।



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मनोरंजन प्रसाद, उपाध्यक्ष, जिला सरपंच संघ


यह आंदोलन अब जन-जन का मुद्दा बन चुका है। यह क्षेत्र कृषि और वन संपदा से भरपूर है। नई रेल लाइन किसानों की उपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में सहायक होगी और खुशहाली का रास्ता खोलेगी।



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श्रीकांत यादव, उपाध्यक्ष, मुंगेर जमुई कोपरेटिव बैंक


यह महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि समय की चेतावनी थी। यदि सिमुलतला जंक्शन होता और वैकल्पिक रेल मार्ग मौजूद होते तो हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य रेलखंड इस तरह लाचार नहीं होता। यह मांग अब सुविधा नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।



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विभा सिंह, जिला परिषद सदस्य
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