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गिरिडीह में कृषि अधिकारी बनकर 5 साल से कर रहे थे ठगी, असिस्टेंट टीचर सहित 2 गिरफ्तार; 100 से अधिक किसानों को लूटा

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पुलिस की गिरफ्त में दोनों अपराधी। (जागरण)



जागरण सवांददाता, गिरिडीह। कृषि पदाधिकारी व अन्य कर्मी बनकर कृषि यंत्र के नाम पर भोले-भाले लोगों को अपने बुने जाल में फांसते हुए ठगी करने के मामले में नगर थाने की पुलिस ने आरोपितों में डुमरी के खुदीसार गांव निवासी करीब 29 वर्षीय सुनील वर्मा व करीब 36 वर्षीय धर्मेंद्र वर्मा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सुनील पेशे से सहायक अध्यापक है जो खुदीसार के नावाडीह मध्य विद्यालय में पदस्थापित है। उक्त जानकारी नगर थाना में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यालय पुलिस उपाधीक्षक वन नीरज कुमार सिंह ने दी।

बताया कि दोनों आरोपित मिलकर कृषि यंत्र आने का झांसा देकर पिछले पांच वर्षों से ठगी कर रहे थे। अब तक 100 से अधिक किसानों व कृषि यंत्र के जरूरतमंदों को अपने झांसे में लेकर लाखों रुपये की ठगी करने का काम किया है।

ये दोनों मिलकर पंचायत सचिवालय में सटा पंचायत सचिव समेत अन्य प्रतिनिधियों के नंबर व स्कूलों में लिखा गया प्रबंधन समिति के सचिव समेत सदस्यों के नंबरों का जुगाड़ कर लोगों को कृषि यंत्र के नाम पर फांसते थे और गिरिडीह शहर में बुलाकर उनसे कार्यालय में ज्यादा पैसा लग जाने का हवाला देकर बाहर ही कम पैसा पर कम हो जाने व कृषि यंत्र प्राप्त कर लेने का भरोसा देकर पैसे लेते थे।

कोई कागज की कमी बताकर उसे फोटोकॉपी कराकर लाने भेजते थे और मौके से चंपत हो जाते थे। बताया कि इसका खुलासा बेंगाबाद के पारडीह गांव निवासी एतवारी महतो व उनके पुत्र अमृत कुमार वर्मा से बीते दिनों हुई 50 हजार रुपये ठगी मामले में 19 जनवरी को दर्ज प्राथमिकी से हुआ।

बताया कि ठगी के शिकार हुए पिता-पुत्र ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपितों को उनके घर खुदीसार से गिरफ्तार किया।

दाेनों ने स्वीकार किया कि अपने रिश्तेदारों से उनके करीबियों, पंचायत सचिवालय व स्कूलों में अध्यक्ष, सचिव व सदस्यों के अंकित नंबरों का जुगाड़ कर कृषि यंत्र के नाम पर पांच वर्षों से ठगी करने में जुटे थे।

पूरे जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को निशाना बनाकर गिरिडीह शहरी क्षेत्र में बुलाकर सीआरपीएफ कैंप के आसपास व अन्य स्थानों पर रकम ली जाती थी।

सबसे मजेदार बात आरोपितों ने बताया कि अपने स्वजातीय लोगों को ही ज्यादातर इस ठगी को लेकर निशाना बनाने का काम किया गया था।

प्रेसवार्ता के बाद दोनों आराेपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। छापेमारी टीम में थानेदार ज्ञानरंजन, एसआइ ऐनुल हक खां, एएसआइ प्रमोद कुमार व प्रवीण कुमार सिंह समेत अन्य शामिल थे।
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