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विधान मंडलों में वर्ष में 30 बैठकें सुनिश्चित करेंगे: ओम बिरला

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि राज्यों के विधानमंडलों में एक वर्ष में न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जाएंगी। डिजिटल प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग से सांसदों और विधायकों की क्षमता का संवर्धन किया जाएगा। इससे विधायिकाओं में होने वाली बहस और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में ओम बिरला ने बताया कि सम्मेलन में छह संकल्प लिए गए हैं। राज्यों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों ने पहला संकल्प यह लिया कि वे अपनी विधायिकाओं के कार्य संचालन के प्रति स्वयं को समर्पित करेंगे जिससे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान दिया जा सके।

दूसरे संकल्प में सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाते हुए राज्य विधायी निकायों की प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित करने के साथ ही विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध समय और संसाधनों का रचनात्मक व प्रभावी उपयोग करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बनाने का काम किया जाएगा।

तीसरे संकल्प में विधायी कार्यों की सुगमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को लगातार सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जनता और विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित करते हुए सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके। चौथे संकल्प के तहत सहभागी शासन की सभी संस्थाओं को आदर्श नेतृत्व प्रदान करने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखना है। इससे राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराएं, मूल्य और सशक्त बन सकेंगे।

पांचवें संकल्प के तहत डिजिटल प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग के क्षेत्र में सांसदों और विधायकों की क्षमता बढ़ाना है, ताकि विधायिकाओं में होने वाली बहस और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शोध व अनुसंधान सहायता को सुदृढ़ किया जा सके।

छठवें संकल्प के तहत विधायी निकायों के कार्य संपादन व वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मूल्यांकन एवं तुलनात्मक आकलन (बेंचमार्किंग) करने के लिए राष्ट्रीय विधायी सूचकांक (नेशनल लेजिसलेटिव इंडेक्स) का निर्माण किया जाना है। इससे जनहित में अधिक उत्तरदायित्व के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जाएगा। सम्मेलन में 24 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के 36 पीठासीन अधिकारी उपस्थित हुए। इनके साथ ही राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 31 प्रधान सचिव व सचिव शामिल हुए। सात राज्य इस सम्मेलन में नहीं आए।

सदन में नियोजित गतिरोध उचित नहीं, हमारी जवाबदेही हर दिन-हर क्षण

लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में लगातार नियोजित गतिरोध व व्यवधान लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। सदन में व्यवधान होता है तो सबसे अधिक उस नागरिक का नुकसान होता है जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी। हमें परिचर्चा और संवाद की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा। लोकतंत्र सर्वोपरि है। हमारी जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं बल्कि हर दिन और हर क्षण है।

मुख्यमंत्री ने पीठासीन अधिकारियों को दिया भोज

पीठासीन अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोपहर में अपने आवास पांच कालिदास मार्ग में भोज दिया। इसके बाद लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला व मुख्यमंत्री दोनों जन भवन गए और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की। इस अवसर पर राज्यपाल को “मोदी : वैश्विक व्यवस्था के शिल्पकार” पुस्तक भी भेंट की।
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