उत्तराखंड के इस बड़े एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट पर मंडरा रहा संकट, भू-अधिग्रहण अधिसूचना को लेकर विरोध तेज
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/68119484-1769055171412.webpरिस्पना एलिवेटेड डिजाइन। जागरण आर्काइव
जागरण संवाददाता, देहरादून। रिस्पना व बिंदाल नदी पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के लिए जारी भू-अधिग्रहण अधिसूचना को लेकर विरोध तेज हो गया है। दून समग्र विकास अभियान सहित विभिन्न जन संगठनों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस परियोजना को आगे बढ़ाने में कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है और जनता की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया है।
संगठनों का कहना है कि सरकार ने अब तक इस परियोजना के नदी तंत्र, पर्यावरण, बाढ़ के खतरे, मसूरी और मसूरी रोड पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर न तो कोई ठोस अध्ययन कराया और न ही कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की। इसके बावजूद परियोजना को जनहित में बताते हुए भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। दून समग्र विकास अभियान ने आरोप लगाया है कि भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत अनिवार्य सामाजिक असर मूल्यांकन व जनसुनवाई की प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। सामाजिक असर मूल्यांकन के नाम पर किसी वैज्ञानिक या तकनीकी अध्ययन के बजाय आम लोगों से अनुमान आधारित राय ली गई, जबकि तथाकथित विशेषज्ञ रिपोर्ट में भी पर्यावरण, प्रदूषण या बाढ़ से जुड़े ठोस आंकड़ों का अभाव है और उसमें केवल भूमि से संबंधित विवरण शामिल है।
जन संगठनों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया से प्रशासन और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। आरोप लगाया गया कि जब लगभग हर सप्ताह इस परियोजना के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है, तब जनता की आपत्तियों को दबाकर और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन कर भू-अधिग्रहण अधिसूचना जारी करना जनविरोधी कदम है।
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