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जीविका दीदियों का साथी एआई: हिसाब-किताब से रोजगार तक, अब सब आसान

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एआई बनेगा जीविका दीदियों का साथी



डिजिटल डेस्क, पटना। Bihar Jeevika AI: बिहार की जीविका दीदियों के लिए अब हिसाब-किताब बोझ नहीं, बल्कि आसान संवाद बनने जा रहा है। कम पढ़ी-लिखी या निरक्षर महिलाएं अब कागज-कलम या जटिल रजिस्टर पर निर्भर नहीं रहेंगी। अपने समूह की आय-व्यय की जानकारी वे बस जुबानी बताएंगी और वर्चुअल अकाउंटेंट अपने-आप पूरा अकाउंट तैयार कर देगा। यह बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए संभव होने जा रहा है।
ग्रामीण विकास में एआई की एंट्री

ग्रामीण विकास विभाग ने जीविका के संचालन को पूरी तरह एआई आधारित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। इसके तहत जीविका की ऑनलाइन प्रणाली में एआई से बना एक एनिमेटेड वर्चुअल अकाउंटेंट जोड़ा जाएगा।

यह अकाउंटेंट न केवल हिसाब तैयार करेगा, बल्कि त्रुटियों को भी खुद पहचान सकेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और समूहों का वित्तीय प्रबंधन ज्यादा मजबूत होगा।
हैदराबाद संस्थान से तकनीकी साझेदारी

इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए बिहार सरकार भारत सरकार के हैदराबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज (एनआईआरडीपीआर) की मदद ले रही है।

राज्य सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। एनआईआरडीपीआर तकनीकी डिजाइन, टूल्स और प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा।
सेहत और कुपोषण पर तुरंत नजर

एआई का उपयोग सिर्फ खातों तक सीमित नहीं रहेगा। जीविका के स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी इसका बड़ा असर दिखेगा। जैसे ही किसी क्षेत्र से स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े डाले जाएंगे, एआई यह बता देगा कि किस इलाके में बीमारी, कुपोषण या स्वास्थ्य संकट ज्यादा है।

इससे समय रहते रिपोर्ट तैयार होगी और तुरंत समाधान लागू किया जा सकेगा।
वर्चुअल ट्रेनर से कौशल विकास

जीविका दीदियों के लिए एआई आधारित वर्चुअल ट्रेनर भी तैयार किया जा रहा है। यह एनिमेटेड ट्रेनर महिलाओं से संवाद कर उनकी रोजगार संबंधी जरूरतों को समझेगा।

उसी आधार पर उन्हें सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्यम या अन्य कौशल का प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण के दौरान सवाल पूछने पर तुरंत जवाब भी मिलेगा।
रोजगार के रास्ते भी बताएगा एआई

सिर्फ ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि किस कौशल से कहां और कैसे रोजगार मिलेगा, इसकी पूरी जानकारी भी एआई देगा। इससे महिलाओं को सही दिशा मिलेगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। यह डिजिटल मार्गदर्शन ग्रामीण महिलाओं के लिए किसी निजी सलाहकार की तरह काम करेगा।
नए-नए डिजिटल टूल्स होंगे तैयार

एनआईआरडीपीआर जीविका के लिए कई तरह के एआई आधारित टूल्स विकसित करेगा। इन टूल्स के इस्तेमाल के लिए जीविका दीदियों और अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थान के विशेषज्ञ बिहार आकर जमीनी स्तर पर सिस्टम को सरल और उपयोगी बनाने में मदद करेंगे।
1.40 करोड़ महिलाओं तक पहुंचेगा असर

बिहार में जीविका से करीब 1.40 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में एआई आधारित यह पहल दुनिया की सबसे बड़ी महिला स्वयं सहायता प्रणालियों में से एक को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगी।

यह सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की नई कहानी लिखने की शुरुआत मानी जा रही है।
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