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संविधान में शामिल सभी भाषाओं में उपलब्ध हैं UCC की सेवाएं, AI करेगा समझने में मदद

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पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड। जागरण आर्काइव



राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में न केवल सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, बल्कि सुशासन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी राज्य को नई पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू की गई यूसीसी को शुरू से ही जनसामान्य के अनुकूल, सरल और पारदर्शी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। यही कारण है कि यूसीसी की सेवाएं अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध है। साथ ही एआईकी सहायता से आवेदक इसकी प्रक्रिया को आसानी से समझने के साथ ही पंजीकरण भी करा सकता है।

यूसीसी लागू करने से पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि पंजीकरण प्रक्रिया अत्यंत सरल और वेबसाइट उपयोगकर्ता अनुकूल हो, ताकि आम नागरिक स्वयं ही बिना किसी सहायता के पंजीकरण कर सके। इसी क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी द्वारा यूसीसी का पोर्टल विकसित किया गया, जिसमें एआई आधारित सहायता को भी जोड़ा गया है। एआई की मदद से आवेदक पूरी प्रक्रिया को आसानी से समझ सकता है, दस्तावेजों से जुड़ी शंकाओं का समाधान पा सकता है और पंजीकरण कर सकता है।

इसे आमजन के लिए बहुभाषी बनाया गया है। इसके तहत इसकी सेवाएं असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उडिय़ा, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी में भी उपलब्ध हैं। इस बहुभाषी व्यवस्था के माध्यम से आवेदक अपनी मातृभाषा में यूसीसी से जुड़े नियम, प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है और उसी भाषा में आवेदन भी कर सकता है।


‘सरकार पहले दिन से ही सरलीकरण से समाधान के मूल मंत्र पर कार्य कर रही है। यूसीसी के क्रियान्वयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी भी नागरिक को पंजीकरण में कठिनाई न हो। उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत दर्ज नहीं हुई है, जो इस व्यवस्था की सफलता और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रमाण है।’-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड



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