35 कफ सिरप सहित 174 दवाओं के सैंपल फेल, CDSCO ने जारी की सूची; हिमाचल व उत्तराखंड की सबसे ज्यादा मेडिसिन शामिल
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/Medicine-1769062874077.webpकफ सिरप सहित दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। प्रतीकात्मक फोटो
सुनील शर्मा, सोलन। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में 35 कफ सीरप सहित 174 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। फेल सैंपल में सबसे अधिक 51 दवाएं हिमाचल और 29 उत्तराखंड से पाई गई हैं। 174 दवाओं में से सात नकली पाई गई हैं।
सीडीएससीओ के दिसंबर के ड्रग अलर्ट में दिल, कैंसर, मधुमेह, हाई बीपी, अस्थमा, संक्रमण, दर्द, सूजन, पेट के कीड़े, अनीमिया, मिर्गी, एसिडिटी, एलर्जी, सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
हर माह देशभर की ड्रग टेस्टिंग लैब में दवाओं की गुणवत्ता को परखा जाता है, जिसमें इंजेक्शन, टैबलेट, सीरप, आई ड्राप व कैप्सूल शामिल हैं। देशभर में हर माह हजारों दवाओं का परीक्षण होता है, जिनमें से कुछ फेल पाई जाती हैं।
प्रमुख बीमारियों की ये दवाएं हुईं फेल
सोलन के फार्मा कैमिको में कीमोथैरेपी, सर्जरी या उल्टी रोकने के लिए बने इंजेक्शन ओडांस्ट्रोन एंड रानीटिडिन एचसीआइ (बैच नंबर 110525), पटना के वेस्टरलिन ड्रग्स में निर्मित सर्दी-जुकाम, नाक बहना और एलर्जी के लक्षणों से राहत दिलाने वाले सीरप हाइड्रोक्लोराइड क्लोरफिनार्मिन मलियट क्यूआर-कोल्ड सिरप (बैच नंबर डब्लयूडीएलबी012), बच्चों की सर्दी-खांसी में इस्तेमाल होने वाले पंजाब के एस्पेन लाइफसांइस में बने कोरन-एलए जूनियर सीरप (बैच नंबर ए20497बी) का सैंपल फेल पाया गया है।
गुजरात के रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल में बने मेंथल सीरप (बैच नंबर आर12जीएल2426), उत्तर प्रदेश के यूनिक्योर इंडिया में निर्मित ब्लड शुगर नियंत्रित करने में उपयोग होने वाली विल्डाग्लिप्टिन और मेटफार्मिन टैबलेट (बैच वीएमएचटी1315), नालागढ़ के थियोन फार्मास्यूटिकल्स में निर्मित हृदय रोगों में रक्त के थक्के बनने से रोकने और स्ट्रोक व हृदयाघात के जोखिम को कम करने वाली दवा क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन टैबलेट्स (बैच जीटी250519) सहित अन्य कई बीमारियों की दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए हैं।
किस राज्य की कितनी दवाएं हुई फेल
हिमाचल के बद्दी, नालागढ़, सिरमौर की दवा कंपनियों में बनी दवाएं गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरी हैं। हिमाचल से 51, उत्तराखंड से 29, तमिलनाडु से 18, गुजरात से 12, हरियाणा से आठ, पंजाब से सात, महाराष्ट्र, बंगाल व राजस्थान से चार-चार दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। बिहार, कर्नाटक, सिक्किम, तेलंगाना, पुडुचेरी से तीन-तीन, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश दो-दो और केरल, ओडिशा, सऊदी अरब, आंध्र प्रदेश, असम व जेएंडके से एक-एक दवा का सैंपल फेल पाया गया है।
ये सात दवाएं पाई गईं नकली
सीडीएससीओ ने रिपोर्ट में सात नकली दवाओं का जिक्र किया है। हालांकि इन दवाओं के रैपर पर किसी कंपनी का नाम अंकित था, लेकिन उन कंपनियों ने उस बैच को नकारा है और अब यह मामला जांच के अधीन है। इन दवाओं में काइमोरल फोर्टे (बैच नंबर 2केयू6एल045), टेलमा-एएम 40एमजी एंड एमलोडिपाइन पांच एमजी (बैच नंबर 18240626), टेलमा-40 (बैच नंबर 18240413), टेलमा-एएम 40एमजी एंड एमलोडिपाइन पांच एमजी (बैच नंबर 05241038ए), मोंटिना-एल टेबलेट (बैच नंबर एसपीजे 241236), पैनटाप-डी एसआर (बैच नंबर एसपीए250021) और काइमोरल फोर्टे (बैच नंबर 2केयू6एल012) को नकली करार दिया है।
हिमाचल से फेल पाए सैंपल को गंभीरता से लिया जा रहा है। जिन फार्मा उद्योगों की दवाओं में कमियां पाई गई हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी होंगे। सभी दवाओं को वापस मंगवाया जाएगा।
-डा. मनीष कपूर, राज्य दवा नियंत्रक हिमाचल।
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