Indian Navy की ताकत में इजाफा, युद्धपोत INS महेंद्रगिरि पर सुपर रैपिड गन तैनात; 35 किमी तक अचूक प्रहार
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/naval-guns-1769076555440.webpसुपर रैपिड गन माउंट। साभार इंटरनेट मीडिया
शैलेंद्र गोदियाल, जागरण हरिद्वार। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) सार्वजनिक क्षेत्र की उन चुनिंदा महारत्न कंपनियों में शामिल है, जिनका योगदान केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा अनुसंधान और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण रहा है।
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए विकसित सुपर रैपिड गन माउंट बीएचईएल हरिद्वार की ओर से निर्मित की जा रही है। यह नेवल गन 35 किमी के दायरे में हवा, पानी और समुद्र में विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों को भेद सकती है।
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साथ ही लक्ष्य की स्थिति के आधार पर विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का चयन करने में भी सक्षम है। यह अत्याधुनिक गन सिस्टम देश के कई युद्धपोतों पर तैनात है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों के तहत बीएचईएल ने रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण को गति दी है। जिससे भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता भी मजबूत हुई है।
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कुछ समय पूर्व बीएचईएल के रक्षा एवं एयरोस्पेस विभाग ने अपनी 50वीं सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) नेवल गन का सफलतापूर्वक निर्माण कर उसे नौसेना को सौंपा। इसे नौसेना के युद्धपोत आइएनएस महेंद्रगिरि पर लगाया गया।
[*]यह एसआरजीएम नेवल गन व रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बीएचईएल पिछले तीन दशक से नौसेना के लिए एसआरजीएम नेवल गन का निर्माण कर रहा है और अब तक 50 गन की आपूर्ति भी कर चुका है। इसके अलावा बीएचईएल ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ मिलकर अनेक महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं में तकनीकी सहयोग प्रदान किया है।
कंपनी की अनुसंधान एवं विकास इकाइयां रक्षा बलों की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्चस्तरीय इंजीनियरिंग समाधान विकसित करती रही हैं। इनमें मैकेनिकल सिस्टम, पावर इलेक्ट्रानिक्स, कंट्रोल सिस्टम और उन्नत निर्माण तकनीकें शामिल हैं।
अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान
बीएचईएल को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और नासा के पहले संयुक्त मिशन निसार से जुड़ने का अवसर मिला।
[*]इसमें मिशन के तहत बीएचईएल के इलेक्ट्रानिक्स सिस्टम्स डिवीजन बेंगलुरु ने निसार सैटेलाइट के लिए तीन स्पेस-ग्रेड सोलर पैनल और एक स्पेस-ग्रेड एलआइ-आइओएन बैटरी बनाई।
इसमें प्रत्येक सोलर पैनल, जिसका आकार लगभग चार वर्गमीटर और पावर क्षमता 1,100 वाट है, मल्टी-जंक्शन सोलर सेल का उपयोग करके विकसित किया गया था। इसके अलावा, लगभग 11 किलोवाट क्षमता की एक एलआइ-आइओएन बैटरी बनाई।
सैटेलाइट को पावर देने के अलावा बीएचईएल की ओर से बनाए गए 112 एलआइ-आइओएन सेल को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लान्च व्हीकल में इंटीग्रेट किया गया था।
[*]जिसने निसार सैटेलाइट को 747 किमी की ऊंचाई पर सन-सिंक्रोनस आर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
[*]यह भारत की अंतरिक्ष और विनिर्माण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
वंदे भारत को भी दी रफ्तार
बीएचईएल (BHEL) ने रेल परिवहन क्षेत्र के लिए अपनी \“मेक इन इंडिया\“ पहलों में एक प्रमुख उपलब्धि हासिल की है।
इसके अंतर्गत टीआरएसएल के साथ बीएचईएल के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा निष्पादित की जा रही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना के लिए बीएचईएल के बेंगलुरु से सेमी-हाई-स्पीड अंडरस्लंग ट्रैक्शन कन्वर्टर और बीएचईएल के झांसी प्लांट से अंडरस्लंग ट्रैक्शन ट्रांसफार्मर की आपूर्ति शुरू कर दी गई है।
ट्रैक्शन कन्वर्टर व ट्रैक्शन ट्रांसफार्मर को वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की अंतिम असेंबली के लिए कोलकाता भेजा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, एक अन्य प्रमुख प्रोपल्शन उपकरण, ट्रैक्शन मोटर को बीएचईएल की भोपाल इकाई की ओर से विकसित और निर्मित किया गया है।
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