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Bhojpur News: शाहाबाद की विरासत होगी सार्वजनिक, 1790 से 1874 तक के रिकॉर्ड होंगे डिजिटल

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शाहाबाद की विरासत होगी सार्वजनिक, 1790 से 1874 तक के रिकॉर्ड होंगे डिजिटल



धर्मेंद्र कुमार सिंह, आरा। शाहाबाद अंचल के गौरवशाली अतीत और प्रशासनिक कार्य प्रणाली से इतिहास में रुचि रखने वाले लोग इससे अवगत हो सकेंगे। वर्ष 1790 से 1874 के बीच शाहाबाद जिले में अंग्रेजी शासन के दौरान अपनाई गई प्रशासनिक व्यवस्था, राजस्व प्रणाली, विकास योजनाओं और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेखों को अब डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जा रहा है। यह पहल इतिहास प्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए एक अमूल्य धरोहर साबित होगी।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के तहत भोजपुर जिला बिहार का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां से 314 वाल्यूम के दुर्लभ और बहुमूल्य अभिलेख राज्य अभिलेखागार को सौंपे गए हैं। इन दस्तावेजों में शाहाबाद जिले के गठन, प्रशासनिक ढांचे, तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका और ब्रिटिश शासन के दौरान लागू की गई नीतियों का विस्तृत विवरण दर्ज है।

डिजिटाइजेशन के बाद ये अभिलेख वैश्विक स्तर पर शोध के लिए सुलभ होंगे। इन रिकॉर्ड्स में वर्ष 1798 से 1871 के बीच शाहाबाद क्षेत्र में हुए बुनियादी ढांचे के विकास की भी जानकारी शामिल है। खासतौर पर रेलवे विस्तार, सोन नदी पर आधारित परियोजनाएं और नहर प्रणाली के विकास को लेकर किए गए कार्यों का उल्लेख इन दस्तावेजों में किया गया है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि उस दौर में किस प्रकार परिवहन, सिंचाई और जल प्रबंधन को प्रशासनिक प्राथमिकता दी गई थी। यह सामग्री आधुनिक योजनाओं के अध्ययन और तुलनात्मक विश्लेषण के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है।

पुराभिलेखपाल डॉ. संजीत कुमार ने बताया कि शाहाबाद के इन ऐतिहासिक रिकार्ड्स का डिजिटलीकरण बिहार के इतिहास को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल अतीत की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास यात्रा को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी प्राप्त होगा।
बाबू वीर कुंवर सिंह से जुड़ीं घटनाएं भी रिकॉर्ड में दर्ज

इतिहास के लिहाज से यह संग्रह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसमें 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े तथ्यों का भी उल्लेख है। शाहाबाद क्षेत्र में विद्रोह की गतिविधियां, अंग्रेजों की दमनात्मक नीतियां और उनके विरुद्ध जनप्रतिरोध की झलक इन दस्तावेजों में मिलती है।

खासकर वीर योद्धा बाबू वीर कुंवर सिंह के अदम्य साहस, रणनीति और बलिदान से जुड़ीं घटनाएं भी अभिलेखों में दर्ज हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देंगी।


डीएम के निर्देश पर जिला अभिलेखागार से 314 वाल्यूम दो बार में बिहार राज्य अभिलेखागार निदेशालय भेजा गया। इसमें तत्कालीन 1757 से 1860 के बीच ऐतिहासिक और प्रशासनिक व्यवस्था का विवरण है। इसके डिजिटाइज होने से विश्व के लोगों को यहां के शासन व्यवस्था की जानकारी मिलेगी। - मोइज जिया, प्रभारी पदाधिकारी अभिलेखागार, आरा
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