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तंत्र के गण: देशसेवा के लिए युवाओं को वर्दी तक पहुंचा रहे झारखंड के ये गुमनाम नायक

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झुमरी तिलैया में टेकलाल दास निःशुल्क प्रशिक्षण से युवाओं को बना रहे देशसेवा के लिए तैयार।



टीम जागरण, रांची। झारखंड के अलग-अलग जिलों में कुछ ऐसे गुमनाम नायक हैं, जो बिना किसी सरकारी सुविधा, प्रचार या स्वार्थ के युवाओं को देशसेवा की राह पर आगे बढ़ा रहे हैं।

कहीं खेल का मैदान प्रशिक्षण केंद्र बन गया है, तो कहीं गांव की पाठशाला देशभक्ति की प्रयोगशाला। सीमित संसाधनों, निजी संघर्षों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद ये लोग युवाओं को सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए तैयार कर रहे हैं। कोडरमा के टेकलाल दास, लोहरदगा के मोगीश और लातेहार के दयामन भगत ऐसे ही जमीनी नायक हैं, जिनका सपना है कि कोई भी प्रतिभाशाली युवा संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए।
खेल के मैदान से वर्दी तक: टेकलाल दास की देशसेवा की पाठशाला

कोडरमा। कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया निवासी टेकलाल दास बीते करीब सात वर्षों से युवाओं को देशसेवा के लिए तैयार करने में जुटे हैं। झुमरीतिलैया के सीएच हाई स्कूल का मैदान उनके लिए सिर्फ खेल का मैदान नहीं, बल्कि देशसेवा की प्रयोगशाला है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे प्रतिदिन 100 से अधिक युवाओं को दौड़, व्यायाम और कठोर शारीरिक प्रशिक्षण देते हैं।

बिना किसी शुल्क और स्वार्थ के टेकलाल दास अग्निवीर, भारतीय सेना, सीआईएसएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ समेत विभिन्न राज्यों की पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैयारी कराते हैं। उनका फोकस सिर्फ शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि वे युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना भी विकसित करते हैं।

झारखंड होमगार्ड के जवान के रूप में सेवा दे रहे टेकलाल दास ड्यूटी के बाद भी मैदान में पहुंचते हैं। अब तक वे करीब 550 युवाओं को प्रशिक्षित कर चुके हैं, जिनमें से 200 से अधिक का चयन दारोगा, पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आर्मी, एयर फोर्स और नेवी में हो चुका है। कभी कम ऊंचाई के कारण स्वयं चयन से वंचित रहे टेकलाल दास आज अपने अनुभव से सैकड़ों युवाओं का भविष्य संवार रहे हैं।

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ग्रामीण युवाओं के लिए उम्मीद की किरण: मोगीश का निश्शुल्क प्रशिक्षण

कैरो (लोहरदगा)। लोहरदगा जिले के कैरो प्रखंड में मोगीश पिछले चार वर्षों से युवाओं और युवतियों को डिफेंस सेवाओं की तैयारी करा रहे हैं। प्रतिदिन 70 से 80 बालक-बालिकाओं को वे निश्शुल्क शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण देते हैं। दौड़, ऊंची कूद, लंबी कूद, पुशअप, सिटअप जैसे अभ्यास के साथ अनुशासन, समय प्रबंधन और टीम भावना पर विशेष जोर दिया जाता है।

ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महंगी कोचिंग एक सपना होती है। ऐसे में मोगीश इन युवाओं के लिए संबल बने हैं। उनका मानना है कि देशसेवा का जज्बा रखने वाला कोई भी युवा संसाधनों के अभाव में पीछे नहीं रहना चाहिए।

उनके प्रशिक्षण से अब तक कई युवा शारीरिक दक्षता परीक्षा में सफल हुए हैं, जबकि दो युवाओं का चयन भारतीय सेना में हो चुका है। प्रशिक्षण लेने वाले युवा बताते हैं कि मोगीश सिर्फ प्रशिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, जो असफलता से डरने के बजाय उससे सीखने की प्रेरणा देते हैं।

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सुदूर गांव से देशसेवा की अलख: दयामन भगत का संकल्प

लातेहार। रांची और लातेहार जिले की सीमा पर स्थित सुदूर आदिवासी गांव ढोंटी में शिक्षक दयामन भगत बीते दो वर्षों से युवाओं को पुलिस और आर्मी के लिए तैयार कर रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने गांव में शिक्षा और अनुशासन की मजबूत नींव रखी है।

दयामन भगत प्रतिदिन बालक-बालिकाओं को निःशुल्क पढ़ाई कराते हैं। सुबह और शाम चलने वाली कक्षाओं में सामान्य अध्ययन, गणित, हिंदी, अंग्रेजी और प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके साथ ही दौड़ और फिटनेस से जुड़े अभ्यास भी कराए जाते हैं।

कक्षाओं के दौरान वे युवाओं को देशभक्ति की कहानियां सुनाकर वर्दी के महत्व को समझाते हैं। उनका मानना है कि वर्दी सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सम्मान है। उनके प्रयासों से ढोंटी गांव में शिक्षा और अनुशासन का माहौल बदला है और आसपास के क्षेत्रों में भी यह पहल प्रेरणा बन रही है।
एक जैसी सोच, अलग-अलग रास्ते

टेकलाल दास, मोगीश और दयामन भगत की राहें भले अलग हों, लेकिन लक्ष्य एक है—युवाओं को देशसेवा के लिए तैयार करना। ये तीनों साबित कर रहे हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी बड़ी क्रांति की शुरुआत बन सकते हैं। झारखंड के ये जमीनी नायक न सिर्फ युवाओं का भविष्य गढ़ रहे हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव को भी मजबूत कर रहे हैं।
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