यूपी के इस जिले में बंदर पकड़ने के लिए 10 लाख का ठेका... लोगों से लेकर अधिकारी तक परेशान
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/05_08_2023-forest_department_sent_300_monkeys_23492346-1768677325331-1769085934422.webpजागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। शहर में बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई है। अब शहर के अंदर बंदर पकड़ने का काम यही विभाग करेगा। इसके लिए शासन ने विभाग से कार्य योजना मांगी है। इसको लेकर विभागीय स्तर से अभियान, बंदर पकड़ने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। नगर पालिका द्वारा अभियान में सहयोग किया जा सकता है।
नगरीय क्षेत्र में उत्पाती बंदर पकड़ने के लिए अभी तक नगर पालिका, नगर पंचायत के स्तर से काम होता था। निकायों के सामने समस्या थी कि बंदरों काे पकड़कर कहां छोड़ा जाए। इसके चलते अभियान चलाने में कोताही बरती गई।
लंबी जद्दोजहद के बाद शासन स्तर से बंदर पकड़ने की रणनीति बदली गई है। यह कार्य अब वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दी गई है। इसके चलते शासन ने वन विभाग से विस्तृत कार्य योजना मांगी है। शहर और अासपास में उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग अपनी रूपरेखा तैयार कर रहा है।
बंदरों के उत्पात से पिंजरा बन गए मकान
शहर में बंदरों के उत्पात से मकान पिंजरा बन गए हैं। मकानों की छतों पर लोगों ने लोहे के जाल लगवा रखे हैं। सबसे अधिक परेशानी नई मंडी और गांधी कालोनी में है। जिस कारण मकान पिंजरा बन गए हैं, जबकि नागरिकों में दहशत बनी है।
मकानों की छत से लेकर छज्जा तक लोहे के जाल से बंद कराया गया है। कालोनियों में निरंतर बंदरों का आतंक बढ़ने से महिला, वृद्धाें के साथ बच्चों को खतरा बना है। आए दिन बंदरों का झुंड लोगों पर हमला बोल देता है। घर-आंगन में खाद्य वस्तुएं खुले में रखना दूभर है।
गांधी कालोनी और नई मंडी क्षेत्र पाश क्षेत्रों में शुमार है। यहां पर बंदरों का झुंड मकानों, दुकानों पर हमला कर लाेगों को चोटिल कर रहा है। इसके चलते नागरिकों ने अपने मकानों की छतों को लोहे की जाल लगवाकर कवर्ड कराया है। साथ ही छज्जा और बालकनी पर भी जाल लगवाकर बंदरों के आतंक से बचाव किया जा रहा है।
पालिका ने खत्म कर दिया ठेका
नगर पालिका ने बंदर पकड़ने के लिए अवनी एंटरप्राइजेज कंंपनी को ठेका दिया था। अभियान की रूपरेखा वन विभाग के अधीन होने के कारण ठेका निरस्त कर दिया गया। शहर में एक हजार बंदर पकड़ने के लिए दस लाख रुपये खर्च किए जाने थे। कार्यदायी संस्था ने मथुरा-वृंदावन से बंदर पकड़ने के लिए विशेषज्ञ बुलाकर 38 बंदर पकड़े थे।
महिलाओं और बच्चों को अकेला देखकर बंदर हमला कर रहे हैं। विशेष रूप से छत पर चढ़ना और सामाना दूभर है। क्षणभर में झुंड के रूप में बंदर आते हैं और नुकसान कर भाग जाते हैं। बंदरों से निजात दिलाए जाने की आवश्यकता है। - रविंद्र कुमार, गांधी कालोनी
मकान के आंगन और छत पर दिनभर बंदरों का आतंक सबसे अधिक है। पानी की टंकियों का ढक्कन उखाड़ने के साथ छतों पर सूखने वाले कपड़े फाड़ देते हैं। भगाने पर झुंड बनाकर हमला करते हैं। जिससे कई बार हादसा होने बचा है। इससे दहशत बनी है। - किशोर कुमार, गांधी कालोनी
बंदरों को पकड़ने के लिए विभागों में कार्य योजना तक ही अभियान सीमित रहता है। कालोनियों की गलियों और छतों पर बंदर उत्पात मचाते हैं। बच्चों और महिलाओं पर झपट पड़ते हैं, जिस कारण समस्या बनी है। इसको लेकर प्रभावी काम होना चाहिए। - प्रवीण कुमार, गांधी कालोनी, नई मंडी
बंदरों का उत्पात कालोनी में है। रोजाना छतों पर चढ़कर नुकसान पहुंचाते हैं। खाद्य सामग्री आंगन तक से उठाकर भाग जाते हैं। महिलाओं और बच्चों को देखकर हमला करते हैं। जिस कारण उनका छत पर चढ़ना दूभर है। - सोहनलाल, गांधी कालोनी
बंदराें को पकड़ने के लिए शासन स्तर से गाइडलाइन मिलेगी। विभागीय स्तर से कार्य योजना बनाई जा रही है। बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना है, लेकिन समस्या ये है कि यह जानवर दौड़कर पुन: आबादी क्षेत्र में पहुंच जाता है। जिले में वन्य जीव अभ्यारण्य का हिस्सा भी सीमित है। अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा जाएगा।
- अभिनव राज, डीएफओ, मुजफ्फरनगर।
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