गंगा स्नान विवाद पर अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर आचार्य सुदर्शन का बयान, बोले, संत परंपरा के विपरीत है उनकी वाणी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/Avimukteshwaranand-and-Acharya-Sudarshan-1769090681649.webpSaints Controversy: आचार्य ने कहा, संत का दायित्व स्वयं को व्यवस्था से ऊपर दिखाकर श्रेष्ठ सिद्ध करना नहीं। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। Ganga Snan Controversy: मौनी अमावस्या पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा स्नान को लेकर चल रहे विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज पर बिहार के एक संत ने टिप्पणी की है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रिय राजऋषि आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद जी की वाणी और उनके कर्म संत परंपरा के विपरीत प्रतीत होते हैं और उन्हें अपने शब्दों तथा आचरण में संयम बरतना चाहिए। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर मेजरगंज स्थित जय सुदर्शन आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आचार्य सुदर्शन ने कहा कि संत का दायित्व स्वयं को व्यवस्था से ऊपर दिखाकर श्रेष्ठ सिद्ध करना नहीं, बल्कि समाज और जनता की समस्याओं के समाधान में सहभागी बनना होता है। संत परंपरा त्याग, संयम और मर्यादा की शिक्षा देती है।
संत मर्यादा नहीं छोड़ते
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि अविमुक्तेश्वरानंद जी द्वारा गोरक्षा पीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा जगदगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के प्रति भी अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। आचार्य सुदर्शन ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि संत क्रोध की अवस्था में भी मर्यादा नहीं छोड़ते हैं।
व्यक्ति या समूह विशेष का प्रभाव
आचार्य सुदर्शन ने आगे कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद जी के हाव-भाव और बयान यह संकेत देते हैं कि वे किसी विशेष व्यक्ति या समूह के प्रभाव में आकर इस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर जो विवाद चल रहा है, उस पर निर्णय आने तक उन्हें संयम और धैर्य बनाए रखना चाहिए। उसके बाद ही उन्हें जगतगुरु के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
सनातन परंपरा को नुकसान
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां संत समाज और सनातन परंपरा को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि संत समाज से देश और समाज को हमेशा सकारात्मक मार्गदर्शन की अपेक्षा रहती है। अंत में उन्होंने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद जी को दिव्य ज्ञान प्राप्त हो और सनातन संत परंपरा की मर्यादा बनी रहे।
प्रयागराज माघ मेला विवाद
गौरतलब है कि जनवरी 2026 में प्रयागराज के माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद जी और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के अवसर पर पुलिस ने उन्हें और उनके अनुयायियों को संगम क्षेत्र में शाही स्नान के लिए जाने से रोक दिया था। प्रशासन का तर्क था कि भारी भीड़ के कारण वीआईपी मूवमेंट पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रशासन की ओर से नोटिस
विवाद बढ़ने पर माघ मेला प्रशासन की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसमें यह पूछा गया कि वे किस आधार पर ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का उपयोग कर रहे हैं, जबकि इस संबंध में मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
इस कार्रवाई को अपमानजनक बताते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया था और अन्न-जल त्याग कर अनशन पर बैठ गए थे। इस घटनाक्रम के बाद संत समाज और प्रशासनिक हलकों में तीखी चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
अविमुक्तेश्वरानंद के ज्ञान के लिए प्रार्थना
आचार्य सुदर्शन ने कहा कि संत समाज से जनता को शांति, धैर्य और मार्गदर्शन की अपेक्षा रहती है, न कि विवाद और कटुता की। उन्होंने अंत में कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद जी को दिव्य ज्ञान प्राप्त हो और सनातन संत परंपरा की मर्यादा अक्षुण्ण बनी रहे।
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