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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस, प्रयागराज माघ मेला में प्रतिबंध लगाने की चेतावनी

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प्रयागराज माघ मेला के त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती। जागरण



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। मौनी अमावस्या पर पालकी से संगम स्नान करने जा रहे जगदगुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोकने और उनके शिष्यों से मारपीट का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद उसके बाद से अपने शिविर के बाहर बैठे हैं। वहीं, प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें दूसरी नोटिस देकर मेला में प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है।

श्री शंकराचार्य आश्रम और बद्रीनाथ हिमालय सेवा शिविर के संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों शिविर अविमुक्तेश्वरानंद के हैं। वहीं, अविमुक्तेश्वरानंद ने त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में वसंत पंचमी पर स्नान न करने की घोषणा की। कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिखित आश्वासन देने के बाद स्नान करेंगे।
खास-खास

- 5 दिन से अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में नहीं कर रहे प्रवेश, वाहन में करते हैं रात्रि विश्राम

- 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर स्नान करने जा रहे थे तभी संगम टावर पर रोके गए थे स्वामी

अविमुक्तेश्वरानंद को मेला प्रशासन ने 19 जनवरी को नोटिस देकर पालकी से शोभायात्रा निकालने, बैरिकेडिंग तोड़ने को लेकर जवाब मांगा गया था। दूसरी नोटिस में आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद पालकी रथ यात्रा से संगम स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों ने 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व पर आरक्षित श्रेणी के पांटून पुल नंबर संख्या दो पर लगे बैरियर व बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए बिना अनुमति वाहन सहित संगम अपर मार्ग से प्रवेश किया।

मेला प्रशासन ने कहा कि मौनी अमावस्या पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ के चलते केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। ऐसे संवेदनशील समय में वाहन प्रवेश से अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। जिससे लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खतरा हो सकता था।

नोटिस में प्राधिकरण का कहना है कि इस कृत्य से माघ मेला की व्यवस्था प्रभावित हुई और भीड़ प्रबंधन में गंभीर कठिनाइयां आईं। इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक के बाद भी अपने आप को शंकराचार्य बताते हुए मेले में बोर्ड और होर्डिंग आदि लगाए हैं। नोटिस में इसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना बताया गया है।

नोटिस के माध्यम से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब न मिलने पर चेतावनी दी गई है कि क्यों न आपकी संस्था को दी जा रही सुविधा और भूमि आवंटन को रद करते हुए स्थायी रूप से मेले में आपके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज सरकार के अनुसार दूसरी नोटिस शिविर पर चस्पा की गई थी, उसका जवाब तत्काल दे दिया गया है।

वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वसंत पंचमी पर स्नान न करने की घोषणा की। उन्होंने कहा, वसंत पंचमी पर कैसे स्नान कर लेंगे? अगर हम स्नान करने जाएंगे तो हमारे लोगों को फिर पकड़कर मारापीटा जाएगा। हमें अपमानित करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लिखित आश्वासन देंगे कि उनके साथ कुछ गलत नहीं किया जाएगा तब बात आगे बढ़ेगी और स्नान करेंगे। कहा कि जिन अधिकारियों ने मारा पीटा है उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्हें और बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे वो नोटिस पर नोटिस देकर हमारी छवि धूमिल कर रहे हैं।

कहा कि हमें दो नोटिस मिली है, दोनों का जवाब दे दिया गया है। दूसरी नोटिस में सुविधा छीनने की बात कही गई है। वह सुविधा रद कर दें, ये उनका विशेषाधिकार है, लेकिन जवाब देना होगा कि पहले बसाया क्यों? और अब सुविधा क्यों रद कर रहे हैं? कहा कि हमने अपनी नोटिस में उन्हें 24 घंटे में जवाब देने को कहा है। जवाब नहीं आएगा तो न्यायालय से कार्रवाई के लिए कहेंगे। जो प्रशासन गलती करने के बाद भी नहीं झुका है वो अपनी जगह से गिर गया है। इतिहास में ऐसे हजारों उदाहरण मिल जाएंगे।

मेलाधिकारी ऋषिराज का कहना है कि दो नोटिस भेजा गया है। पहली नोटिस में 18 जनवरी को पहिया लगी पालकी पर सवार होकर बैरियर व बैरिकेडिंग तोड़ने तथा पुलिस-प्रशासन के कार्य में बाधा डालने को है, जबकि दूसरी नोटिस में इस प्रकरण को लेकर भूमि-सुविधा आवंटन रद तथा मेला में प्रवेश प्रतिबंधित करने को लेकर है। बताया कि सुविधा पर्ची के दिशा-निर्देशों के बिंदु संख्या 16 में इसका उल्लेख है, जिसके अनुसार प्रयागराज मेला प्राधिकरण को यह अधिकार है।
नोटिस दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक व मिथ्या कथनों से युक्त

माघ मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से माघ मेला में उनके शिविर प्रभारी पंकज पांडेय ने कहा है कि यह नोटिस दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक, झूठ-छल-फरेब व मिथ्या कथनों से युक्त है। नोटिस सत्य से परे है, जिसकी निंदा की जाती है। जवाब में कहा कि मेला प्रशासन के नोटिस में बग्घी ले जाने का उल्लेख है, जो सरासर गलत है। बग्घी एक ऐसी गाड़ी होती है जो कम से कम दो घोड़ों द्वारा खीची जाती है। उसमें तीन-चार फीट व्यास वाले चार पहिया लगी होती हैं।
इस तरह की कोई बग्घी नहीं है

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पास शिविर में इस तरह की कोई बग्घी नहीं है। इसलिए यह आरोप निराधार, मनगढ़ंत, बेबुनियादपूर्ण तथा कपटपूर्ण है। यह आरोप मिथ्या है, जिसे मेला में लगे सीसीटीवी के फुटेज से देखा जा सकता है। जहां तक शंकराचार्य पद के उल्लेख की बात है तो इसका समुचित उत्तर सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता डा.पीएन मिश्र ने प्रेस कांफ्रेंस में सब बता दिया है। साथ ही अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र ने मेलाधिकारी को मेल पर जवाब दे दिया। कार्यालय में किसी ने हार्ड कापी नहीं ग्रहण किया तो कार्यालय के प्रवेश द्वार पर उपलब्ध स्थान पर उत्तर पत्र चस्पा कर उसका वीडियो बनाया गया है। अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र सरकार ने कहा कि सरकार अब बदले की भावना से कार्य कर रही है। प्राधिकरण ने बिना बताए शिविर के पीछे की दीवार पर बैक डेट में नोटिस चस्पा किया है।
नोटिसों पर स्वामी के जवाब पर ली जा रही विधिक राय

मेला प्रशासन के दोनों नोटिस के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दिए गए जवाब को लेकर अब विधिक राय ली जा रही है। मेलाधिकारी ऋषि राज ने बताया कि इसके लिए मेला प्रशासन की तरफ से दो कमेटियां गठित की गई हैं। पहली नोटिस के जवाब को लेकर विधिक राय के लिए एडीएम मेला दयानंद प्रसाद व एसडीएम मेला विवेक शुक्ला की समिति गठित की गई है। वहीं दूसरी नोटिस के जवाब को लेकर विधिक सलाह के लिए एडीएम मेला दयानंद प्रसाद और एएसपी मेला विजय आनंद की कमेटी गठित की गई है। दोनों कमेटियों की ओर से प्रयागराज मेला प्राधिकरण की विधिक सलाहकार समिति से राय ले रही है। जल्द ही दोनों कमेटियां आगे की कार्यवाही के लिए अपनी रिपोर्ट मेला प्रशासन को देंगी। इसके बाद उच्चाधिकारी आगे की कार्यवाही के लिए निर्णय लेंगे।
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