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डेढ़ अरब खर्च होने के बावजूद सुगम नहीं हुआ सफर, बड़ी लाइन बनने के बाद ट्रेनों की अनियमितता से बढ़ी परेशानी

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जागरण संवाददाता, मऊ। जिले के इंदारा-दोहरीघाट रेल मार्ग पर जब छोटी लाइन थी तब इस रूट पर चार-चार ट्रेनें चलाई जाती थी। लोग दोहरीघाट व गाँठा में गुड़ का बाजार करने जाया करते थे, गोंठा के किसान ट्रेन से इंदारा व मऊ गुड़ बेचने आया करते थे। यही नहीं दोहरीघाट से जनपद मुख्यालय आने-जाने का यह मुख्य साधन हुआ करता था।

यहां के लोगों की वर्षों से मांग चली आ रही थी कि इस मार्ग को बड़ी लाइन में परिवर्तित किया जाए तथा यहां से ट्रेनें चलाई जाए। रेलवे प्रशासन ने उनकी मांग को पूरा भी किया। रेलवे प्रशासन ने बड़ी लाइन के साथ-साथ विद्युतिकरण का भी कार्य करवाया तथा जगह-जगह पड़ने वाले स्टेशनों के भवनों का भी नए सिरे से निर्माण कराया और दोहरीघाट से प्रयागराज के लिए एक जोड़ी डीएमयू भी चलाई। डीएमयू चलने से लोगों ने काफी राहत महसूस किया, लेकिन इसकी निरंतरता नहीं होने के चलते लोगों के हाथ मायूसी ही लगी। महसूस

शनिवार को नहीं चलती है डीएमयू बड़ी लाइन होने के बाद प्रयागराज से चल कर देपहर बाद सवा एक बजे दोहरीघाट पहुंचने के पश्चात 20 मिनट बाद पुनः प्रयागराज के लिए डीएमयू ट्रेन यहां से जाती है। 24 घंटे में आने जाने के लिए एक चक्कर ही इस ट्रेन को चलाया जाता है। यही नहीं शनिवार को यह बंद रहती है। इसके चलते लोगों के आने-जाने की निरंतरता नहीं बन पा रही है।

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पहले जव यहां छोटी लाइन थी तब इस रूट पर चार जोड़ी ट्रेनें चलती थीं. लेकिन अब इस रूट पर लगभग डेढ़ अरव खर्च किए जाने के बावजूद भी जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। -कमलेश पाल दोहरीघाट।

बड़ी लाइन होने व डीएमयू चलने के बाद इस क्षेत्र के लोगों में एक उम्मीद जगी थी कि अब यहां से दोहरीघाट से ट्रेनें चलेंगी और लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। लेकिन यह आस अधूरी ही रह गई। - चंदन

छोटी लाइन के समय दोहरीघाट से छपरा, कोलकाता, दिल्ली आदि शहरों के लिए ट्रेनें चलाई जाती थीं। और गोठा के व्यापारी अपना गुड़ आदि बेचने के लिए जाया करते थे। अब ये सभी सेवाएं बंद हो गई है। - विकास वर्मा दोहरीघाट।

इंदारा-दोहरीघाट मार्ग पर नई ट्रेन चलाने के लिए जिले के मंत्री एके शर्मा के लिए कोई बड़ी बात नहीं हैं। वे प्रधानमंत्री के साथ व रेल मंत्री के साथ काम किए हुए हैं और उनकी पहुंच भी है। उन्हें जिले की इस बड़ी समस्या के समाधान के लिए आगे आने की जरूरत है। - देव प्रकाश राय सहरोज।

दोहरीघाट से सहजवां तक नई लाइन बिछाए जाने की घोषणा की गई थी तथा बताया गया था कि इस रूट पर कई ट्रेनें भी चलाई जाएंगी। लेकिन वह घोषणा केवल घोषणा ही बन कर रह गई उसे धरातल पर नहीं उतारा जा सका। - राजेश राय गोंठा।

ट्रेन समय से नहीं चलने के चलते हमारी रोजी-रोटी बंद हो गई है। सुबह से ट्रेनें चलती रहती तो लोग मुख्यालय आते-जाते और अधिक से अधिक टिकट का विक्री होता। - विनोद यादव टिकट अभिकर्ता।

इंदारा-दोहरीघाट मार्ग पर यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा मिले, इसका प्रयास किया जा रहा है। साथ ही ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की योजना तैयार की जा रही है। - आशीष जैन, डीआरएम, वाराणसी।
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