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खालिस्तान समर्थक अमृतपाल मामले में नया मोड़, जज ने केस से खुद को किया अलग; अब विशेष पीठ करेगी सुनवाई

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अमृतपाल की याचिका से पीठ के एक जज ने खुद को किया अलग (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, जागरण, चंडीगढ़। खडूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की एक याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गुरुवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। मामले की सुनवाई कर रही पीठ के एक जज ने स्वयं को इस केस से अलग कर लिया।

अब यह मामला शुक्रवार को विशेष रूप से गठित पीठ के समक्ष सुना जाएगा। बता दें, याचिका में अमृतपाल सिंह द्वारा संसद के बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति देने की मांग की गई है।

जानकारी के अनुसार, चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ के सामने जैसे ही यह याचिका आई, अदालत ने पहले ही विचार किया कि संबंधित प्राधिकारी को अमृतपाल सिंह की ओर से दी गई रिप्रेजेंटेशन पर छह दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश देकर मामला निपटाया जा सकता है। इससे पहले कि कोई औपचारिक आदेश पारित किया जाता।

चीफ जस्टिस ने कहा, “हमारे सामने एक और समस्या है, पीठ के एक सदस्य जज इस मामले से खुद को अलग कर रहे हैं, इसलिए यह मामला अब विशेष पीठ के समक्ष जाएगा।”

सुनवाई के दौरान अमृतपाल की ओर से अदालत में आग्रह किया गया कि उनकी रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय लेने के लिए सरकार को चार दिन का समय दिया जाए, क्योंकि संसद का बजट सत्र नजदीक है। पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि अमृतपाल सिंह एनएसए के तहत डिब्रूगढ़ जेल में बंद है।

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर दो चरणों में चलेगा। पहला चरण 13 फरवरी तक और दूसरा चरण मार्च से अप्रैल तक चलेगा।

राज्य ने तर्क दिया कि यह कहना गलत है कि सत्र केवल फरवरी तक सीमित है, क्योंकि इसका दूसरा भाग भी है। साथ ही यह भी कहा गया कि गणतंत्र दिवस के कारण प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया बाधित होने से सरकार के लिए 28 जनवरी से पहले अमृतपाल की रिप्रेजेंटेशन पर फैसला करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने स्पष्ट किया कि इस मामले में न तो लोकसभा अध्यक्ष की कोई भूमिका है और न ही राज्यपाल की। अमृतपाल ने अपनी याचिका में अनुरोध किया था कि उन्हें संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए पैरोल दी जाए।

चीफ जस्टिस ने अमृतपाल के वकील को कहा कि निर्णय आने तक वह अमृतपाल को पढ़ने और अपने मुद्दों पर शोध करने को कहें। वकील ने कहा कि वह जेल में हैं, लेकिन चीफ जस्टिस ने कहा कि जेल का वातावरण ऐसा कार्य करने के लिए उपयुक्त है।

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