Chikheang Publish time Yesterday 22:27

तमिलनाडु और केरल के बाद कर्नाटक में भी राज्यपाल के अभिभाषण पर विवाद

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दक्षिण के एक और राज्य में राज्यपाल के अभिभाषण पर बवाल।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु और केरल के बाद कर्नाटक में भी राज्यपाल के अभिभाषण पर विवाद हो गया है। कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधानसभा के संयुक्त सत्र में राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया संबोधन पढ़ने से इन्कार कर दिया।

उन्होंने अपना भाषण मात्र तीन पंक्तियों में समाप्त कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर केंद्र सरकार की कठपुतली होने का आरोप लगाया। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति, विपक्ष के नेताओं, मंत्रियों और सदस्यों का अभिवादन करते हुए अपना अभिभाषण शुरू किया।
राज्यपाल ने हिंदी दिया भाषण

उन्होंने हिंदी में कहा-राज्य विधानसभा के संयुक्त सत्र में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। कर्नाटक विधानसभा के एक और संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक और सामान्य विकास की गति को दोगुना करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। जय हिंद। जय कर्नाटक। यह कहकर वह बाहर चले गए।
विधायकों ने की राज्यपाल को घेरने की कोशिश

इस पर विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल समेत सत्ता पक्ष के विधायक खड़े हो गए और गहलोत से अपना भाषण पूरा करने का अनुरोध किया। एमएलसी बीके हरिप्रसाद समेत सत्ताधारी विधायकों ने राज्यपाल को घेरने की कोशिश की। लेकिन, सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें हटा दिया। इसके बाद विधायकों ने कन्नड़ में \“\“धिक्कारा-धिक्कारा, राज्यपालारिगे धिक्कारा\“\“ के नारे लगाए।

वहीं, भाजपा सदस्यों ने \“\“भारत माता की जय\“\“ के नारे लगाए। सिद्दरमैया ने गहलोत की आलोचना करते हुए उन पर संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने अपना ही भाषण पढ़ा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा तैयार किया गया पूरा भाषण नहीं पढ़कर संविधान का उल्लंघन किया है। हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का रुख करें या नहीं।
केंद्र की आलोचना से नाराज थे राज्यपाल

गहलोत ने बुधवार को राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इन्कार कर दिया था। उन्होंने मनरेगा को केंद्र सरकार द्वारा \“\“निरस्त\“\“ किए जाने संबंधी कुछ संदर्भों पर आपत्ति जताई थी।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण में कुल 11 पैराग्राफ ऐसे थे, जिनमें कथित तौर पर केंद्र सरकार की आलोचना की गई थी और मनरेगा को रद करने तथा निधियों के हस्तांतरण से संबंधित मुद्दों की चर्चा की गई थी। इन पैराग्राफ से राज्यपाल नाराज थे और वह इन्हें हटवाना चाहते थे। लेकिन, राज्य सरकार को यह मंजूर नहीं था।
तीन दिनों में टकराव की तीसरी घटना

पिछले तीन दिनों में दक्षिण भारत के गैर-भाजपा शासित राज्यों में राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की यह तीसरी घटना है। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि मंगलवार को वर्ष के पहले सत्र के पहले दिन यह कहते हुए पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही विधानसभा से बाहर चले गए थे कि अभिभाषण के पाठ में गलतियां थीं।

इसके अगले दिन केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने भाषण के कुछ हिस्सों को छोड़ दिया था। लोक भवन ने दावा किया कि राज्यपाल के सुझावों को अभिभाषण के मूल मसौदे से हटा दिया गया था।
भाजपा ने किया राज्यपाल का बचाव

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने राज्यपाल द्वारा सरकार की ओर से तैयार भाषण से हटकर बोलने के फैसले का जोरदार बचाव किया। उन्होंने सत्ताधारी कांग्रेस पर केंद्र के खिलाफ जन असंतोष भड़काने के लिए सदन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। उन्होंने सिद्दरमैया से राज्यपाल पर हमला करने की कोशिश करने वाले कांग्रेस विधायकों और एमएलसी के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की।

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