सारंडा में माओवादियों का अजेय गढ़ ढहा: प्रशांत बोस और अनल के आतंक का अंत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/22/article/image/naxal1-1769100893154_m.webpमाओवादियों के सबसे मजबूत गढ़ के रूप में शुमार पश्चिमी सिंहभूम जिले का सारंडा वन क्षेत्र।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। कोल्हान प्रमंडल का सारंडा वन क्षेत्र, जो अपनी भौगोलिक दुर्गमता के कारण दशकों तक माओवादियों के लिए एक \“सुरक्षित किला\“ बना रहा, अब उनके हाथ से निकलता जा रहा है। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF) की निरंतर कार्रवाई और शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी ने इस माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। (Saranda ka ajey kila Dhaha)
शीर्ष नेताओं का ठिकाना और रणनीतिक कॉरिडोर सारंडा का घना जंगल कभी प्रशांत बोस (Pramod Mishra) और उसकी पत्नी जैसे शीर्ष माओवादी नेताओं का मुख्य केंद्र था। संगठन के रणनीतिकार अनल उर्फ पतिराम मांझी ने यहां एक ऐसा \“नक्सल कॉरिडोर\“ तैयार किया था जो हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह से लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा तक फैला था। इसी रास्ते से माओवादी नेता एक राज्य से दूसरे राज्य में आसानी से प्रवेश करते थे।(Saranda ka ajey kila Dhaha)
जानें दुुर्दांत नक्सली अनल का प्रभाव
मूल रूप से गिरिडीह निवासी अनल 149 मामलों में वांछित था। उसने गिरिडीह से लेकर सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम तक एक सशक्त संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया था। नए लड़ाकों (रंगरूटों) को सशस्त्र प्रशिक्षण देने के लिए सारंडा के दुर्गम क्षेत्रों का उपयोग किया जाता था।
दहशत का इतिहास: बिटकल सोय से तिरुलडीह तक
सारंडा में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच संघर्ष का लंबा और खूनी इतिहास रहा है। वर्ष 2002 में बिटकल सोय कांड और 2004 की बड़ी वारदातों ने पूरे देश को दहला दिया था, जिसमें कई जवान शहीद हुए थे। इसके बाद \“ऑपरेशन ग्रीन हंट\“ के जरिए नक्सलियों को चुनौती दी गई।
14 जून 2019 को अनल के दस्ते ने सरायकेला के कुकडू हाट बाजार में 5 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या कर दी थी। हालांकि, बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सुनील टुडू और बुधराम मार्डी समेत 5 आरोपितों को सलाखों के पीछे भेजा। (Saranda ka ajey kila Dhaha)
2025: आर-पार की जंग और संगठन का बिखराव
वर्ष 2025 सुरक्षा बलों के लिए निर्णायक साबित हुआ। हजारीबाग और गिरिडीह जैसे क्षेत्रों के हार्डकोर माओवादियों के साथ सुरक्षा बलों की कई बार आमने-सामने की मुठभेड़ हुई। (Saranda ka ajey kila Dhaha)
माओवादियों के पतन के मुख्य कारण
[*] शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी: सरायकेला-खरसावां से प्रशांत बोस और उसकी पत्नी की गिरफ्तारी ने संगठन को नेतृत्व विहीन कर दिया।
[*] महाराज प्रमाणिक का सरेंडर: 25 अगस्त 2021 को महाराज प्रमाणिक के आत्मसमर्पण ने सरायकेला, कुचाई और चांडिल जैसे क्षेत्रों में माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
[*] सीमा सुरक्षा: ओडिशा सीमा पर सुरक्षा बलों की बढ़ती चौकसी ने नक्सलियों के \“एस्केप रूट\“ (भागने के रास्ते) को बंद कर दिया है।
सरकार की पुनर्वास नीति का हो रहा खास असर
आज सारंडा में माओवादियों का वह अजेय माना जाने वाला गढ़ तेजी से सिमट रहा है। सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन का दोहरा असर दिख रहा है। हालांकि क्षेत्र में अब भी कुछ छोटे दस्ते सक्रिय हो सकते हैं, लेकिन वह व्यापक नेटवर्क और कॉरिडोर अब इतिहास की बात बनता जा रहा है।
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