बिहार सरकार: बेहतर प्रदर्शन वाले बैंकों से ही लेन-देन, रैंकिंग शुरू; खराब बैंकों से कारोबार बंद
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/23/article/image/Nitish-1769116245558_m.webpराज्य ब्यूरो, पटना। बार-बार की चेतावनी से बेअसर बैंकों को बिहार के प्रति जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से सरकार ने दो पहल की है। गुरुवार को राज्य-स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 95वीं बैठक में इसकी घोषणा की गई। पहली पहल, प्रदर्शन के आधार पर शुरू की गई बैंकों की रैंकिंग प्रणाली है। अब बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों में ही राज्य सरकार लेन-देन करेगी।
इसकी चेतावनी वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने दी। दूसरी पहल, विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन का निर्णय है, जो बैंकों की कार्य-प्रणाली और उपलब्धि की निगरानी करेगी। बैठक की अध्यक्षता करते हुए वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इसकी घोषणा की। प्राकृतिक संपदा से भरपूर बिहार की विशेषताओं को बैंकिंग कारोबार के अनुकूल बताते हुए उन्होंने बैंकों से राज्य के विकास में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र की उपेक्षा पर क्षोभ प्रकट किया और बैंकों को साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) अनुपात में अपेक्षित सुधार का निर्देश दिया।
बैठक में सितंबर 2025 यानी चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही तक की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। बिहार का सीडी रेशियो अभी 58.17 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत (84.32 प्रतिशत) की तुलना में काफी कम है। वार्षिक साख योजना (एसीपी) के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य की तुलना में उपलब्धि 42.59 प्रतिशत ही है। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) में तो बैंक रुचि ही नहीं ले रहे। इस पर विकास आयुक्त मिहिर सिंह ने बैंकों की तगड़ी खिंचाई की। एसएलबीसी के संयोजक एसएसबी का प्रदर्शन भी बेहद लचर रहा है। बिहार के प्रति बैंकों के रवैये के लिए इसके बाद किसी दूसरे उदाहरण की आवश्यकता नहीं पड़ती।
एसएलबीसी की पिछली बैठक के दौरान वित्त विभाग का दायित्व सम्राट चौधरी के पास था। तब कमतर प्रदर्शन से खिन्न होकर उन्होंने यूको बैंक को बोरिया-बिस्तर तक बांध लेने की चेतावनी दी थी। उस स्थिति मेंं आज भी कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ है। अब कुल सौ अंकों वाले दस पैमाने पर उनका प्रदर्शन होगा। वित्तीय वर्ष की दो तिमाही में इस पैमाने पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन भी संतोषजनक नहीं रहा है। मात्र 11 बैंकों को 40 से अधिक अंक मिले हैं। बाकी 23 बैंक इससे नीचे हैं।
इस स्थिति से क्षुब्ध होकर आनंद किशोर ने कहा कि हर बैठक में बैंक एक जैसे वादे दोहराते हैं। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं। अब प्रदर्शन में खरा नहीं उतरने वाले बैंकों से सरकार कोई कारोबार नहीं करेगी। वित्त मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि बैंक अपनी रैंकिंग में सुधार नहीं करेंगे तो बिहार में सरकार उन्हें कई प्रकार की सुविधाओं से वंचित कर देगी। बिहार के लोगों की जमा राशि का दूसरे राज्यों में स्थानांतरित होना एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर बैंकों को ध्यान देना चाहिए। उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने निवेश के लिए योजना लाने का आश्वासन दिया। मत्स्य व पशुपालन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने सहवर्ती क्षेत्र में कम ऋण पर चिंता जताई।
ऋण वितरण में असमानता
शिवहर, लखीसराय, बांका और मुंगेर में एसीपी 27 प्रतिशत से भी कम है। समग्रता में कृषि क्षेत्र में लक्ष्य की तुलना मे मात्र 28 प्रतिशत ऋण का वितरण हुआ है। पूर्णिया आदि सीमांचल के जिलों में सीडी रेशियो 70 प्रतिशत तक है, जबकि कई जिलों में 50 प्रतिशत से कम। रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद ने इस विषमता को बिहार के सर्वांगीण विकास के प्रतिकूल बताया। सर्टिफिकेट केस के लंबित मामलों में वृद्धि पर उन्होंने चिंता जताई।
नाबार्ड ने बनाई दो योजनाएं
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने बताया कि कम अवधि के लिए फसल ऋण की स्थिति अच्छी है। बिहार में खेत का औसत आकार 0.39 हेक्टेयर है, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.08 हेक्टेयर है। ऐसे में उन्होंने छोटे प्लाट से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए रणनीति बनाने पर जोर दिया। बताया कि नाबार्ड ने दो योजनाएं तैयार की हैं, जो शीघ्र ही बैंकों से साझा की जाएगी। पहली योजना के अंतर्गत लाभप्रद खेती के लिए क्लस्टर चिह्नित किए गए हैं। दूसरी योजना सोलर ड्रायर परियोजना से संबंधित है। बिहार में फल और सब्जी की बहुत बर्बादी हो रही। इस योजना के अंतर्गत उनका बाई-प्रोडक्ट बनेगा।
एनपीए तो बहाना है
बिहार मेंं मार्च, 2025 में एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) 7.72 प्रतिशत था, जो सितंबर, 2025 में बढ़कर 7.95 प्रतिशत हो गया। बैंकों ने कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक 36 प्रतिशत एनपीए की दुहाई दी। कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि बैंक बिहार से भेदभाव कर रहे। वे बिहार से जमा लेकर दिल्ली-मुंबई में ऋण बांट रहे। चालबाज अरबों-खरबों लेकर देश छोड़ जा रहे, वह एनपीए नहीं और बिहार में एनपीए का बहाना बनाया जा रहा। .
समिति का स्वरूप
बैंकों के कामकाज की निगरानी के लिए गठित होने वाली समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त करेंगे। वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव, रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक, नाबार्ड और स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक उसके सदस्य होंगे।
बैंकों का मूल्यांकन
कारक / पैमाना अंक
सीडी रेशियो
25
एससीपी
20
केसीसी
10
डेरी
5
पाल्ट्री
5
फिशरी
5
स्वयं सहायता समूह
10
पीएमईजीपी
10
पीएमएफएमई
5
पीएम-स्वनिधि
5
कुल अंक
100
बैंकों का प्रदर्शन (सितंबर, 2025 तक)
सीडी रेशियो
बैंक का प्रकार जमाऋणसीडी रेशियो
वाणिज्यिक बैंक
533976
289635
54.24%
को-ऑपरेटिव बैंक
6354
5205
81.93%
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
48372
31056
64.20%
लघु वित्त बैंक
2716
8485
312.39%
आरआईडीएफ
0000
9634
0000
कुल (Total)
591417
344014
58.17%
(नोट : जमा और ऋण करोड़ रुपये में)
45% से कम सीडी रेशियो वाले जिले
मुंगेर 32.29%, नालंदा 42.04%, भोजपुर 42.22%, सारण 42.38%, लखीसराय 42.91%, बक्सर 43.43%, जहनाहाद 43.44%, अरवल 43.66%
एसीपी
क्षेत्रलक्ष्य उपलब्धिउपलब्धि %
कृषि
112000
31126
27.79%
एमएसएमई
119000
61175
51.41%
ओपीएस
9000
2688
29.87%
टीपीएस
240000
94989
39.58%
एनपीएस
96000
143115
50.13%
कुल
336000
143115
42.59%
(नोट : लक्ष्य व उपलब्धि करोड़ रुपये में, ओपीए : अन्य प्राथमिकता क्षेत्र, टीपीएस : कुल प्राथमिकता क्षेत्र, एनपीएस : गैर-प्राथमिकता क्षेत्र)
एसीपी उपलब्धि में फिसड्डी पांच जिले
शिवहर : 24.11%, लखीसराय : 24.70%, बांका : 24.78%, मुंगेर : 26.61%, गोपालगंज : 27.10%
किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी)
श्रेणीलक्ष्यवितरणउपलब्धि %
केसीसी
37400
7067
18.89%
पशुपालन
2235
447
19.99%
मत्स्य पालन
520
22.49
4.33%
(नोट : लक्ष्य व वितरण करोड़ रुपये में)
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