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टूटी व धूल भरी सड़कों ने बढ़ाया प्रदूषण का संकट, दिल्ली के द्वारका में उड़ते धूल के गुबार से राहगीर बेहाल

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द्वारका की सड़कों पर धूल का भारी गुबार उठता नजर आया। जागरण



जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सुधारने के सरकारी दावों के बीच द्वारका के सेक्टर-14 की बदहाल सड़कें प्रदूषण का बड़ा कारण बनती जा रही हैं। मंगलवार को इन इलाकों में टूटी सड़कों और उन पर जमी मिट्टी की मोटी परत के कारण धूल का भारी गुबार उठता नजर आया।

हालात इतने खराब हैं कि राहगीरों और वाहन चालकों का दम घुटने लगा है। धूल के कारण दृश्यता लगभग शून्य हो जाने से दोपहिया वाहन चालकों को मजबूरन सड़क किनारे रुकना पड़ रहा है।

वहीं, सेक्टर-10 में सड़क किनारे धूल भरे मैदान में ड्राइंविंग सीख रहे लोगों द्वारा उड़ाए जा रहे धूल ने राहगीरों की परेशानी बढा दी है।

द्वारका सेक्टर-14 स्थित वेगास मॉल के पीछे वाली सड़क की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। सड़क टूटी हुई है और उस पर धूल की मोटी परत जमी है। जब भी यहां से कोई वाहन, विशेषकर भारी वाहन गुजरता है, तो पीछे चल रहे वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। धूल का गुबार इतना घना होता है कि पीछे चल रहे चालक को सामने कुछ भी दिखाई नहीं देता। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को झेलनी पड़ती है। बाइक सवारों को मजबूरन अपनी गाड़ी सड़क किनारे खड़ी कर तब तक इंतजार करना पड़ता है, जब तक आगे चल रहा वाहन आगे न निकल जाए और धूल कुछ शांत न हो जाए।

कुछ ऐसी ही स्थिति सेक्टर-10 स्थित परिवहन विभाग के सामने वाले मैदान की है। यहां खाली पड़ी कच्ची और उबड़-खाबड़ जमीन पर लोग वाहन चलाना सीखते हैं। उनके टायरों से उड़ने वाली धूल पास की सड़क से गुजर रहे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। यहां कुछ देर खड़ा रहना भी खुद को धूल से नहलाने जैसा है। चंद पलों में ही लोगों के चेहरे और कपड़ों पर मिट्टी की परत जम जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मुख्य सड़कें ही धूल उड़ाने का जरिया बन चुकी हैं, तो दिल्ली की हवा आखिर साफ कैसे होगी। प्रशासन की लापरवाही के कारण सड़कों से उठने वाली यह धूल न सिर्फ यातायात की रफ्तार रोक रही है, बल्कि द्वारका के रिहायशी इलाकों को प्रदूषण जनित बीमारियों के मुहाने पर खड़ा कर रही है। अब लोग सड़क मरम्मत और धूल नियंत्रण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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टूटी सड़क और ऊपर से यह उड़ती धूल। यहां से गुजरने के बाद आंखों में इतनी जलन होती है कि काम करना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन आखिर सो क्यों रहा है। - मारीदास प्रधान, राहगीर

सड़कों की यह धूल सीधे हमारे फेफड़ों में जा रही है। जब गाड़ियां धूल उड़ाती हैं तो बाइक रोकना हमारी मजबूरी बन जाती है। यहां सांस लेना भी जोखिम भरा हो गया है। - रविन्द्र कुमार, राहगीर
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