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इंदौर के बाद महू में गंदा पानी पीकर बीमार पड़े 25 लोग, पीलिया-टाइफाइड की चपेट में लोग

कुछ दिनों पहले ही मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई थी। अब मध्य प्रदेश के ही एक और जिले महू में दिखा है। महू में दूषित पानी पीने की वजह कम से कम 25 लोग बीमार हो गए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मध्य प्रदेश के इंदौर जिले की महू तहसील में दूषित पानी पीने से करीब 25 लोग बीमार हो गए हैं।



सामने आई ये बड़ी जानकारी



महू ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. योगेश सिंगारे ने बताया कि जांच में चार मरीजों में टाइफाइड, लिवर से जुड़ा इंफेक्शन और पीलिया पाया गया है। वहीं, जिन लोगों में हल्के लक्षण हैं, उनका इलाज घर पर ही किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं, ताकि नए मरीजों की पहचान हो सके और लोगों को सावधानी बरतने की जानकारी दी जा सके।




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स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, भर्ती मरीजों में मोती महल इलाके के आदर्श (5), कृषु (4) और यथार्थ (10) शामिल हैं, जिनका इलाज रेड क्रॉस अस्पताल में चल रहा है। इसके अलावा 62 वर्षीय जगदीश चौहान को लिवर इन्फेक्शन की पुष्टि होने के बाद बेहतर इलाज के लिए इंदौर भेजा गया है।



स्थानीय लोगों मे बताई ये बात



इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले दो हफ्तों से सप्लाई हो रहा पानी गंदा और बदबूदार है। इसी पानी को पीने के बाद कई लोग बीमार पड़े हैं, जिनमें बच्चे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट राकेश परमार ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और बताया कि जांच के लिए पानी के सैंपल लैब भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल लोगों को सिर्फ उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी गई है और स्थिति को नियंत्रण में बताया गया है। इसी बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रिंसिपल बेंच ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में पीने के पानी में सीवेज मिलने की खबरों पर खुद संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल ने इसे गंभीर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा बताया है।



इंदौर में पानी प्रदूषण से मौतों का मामला



यह घटना पिछले महीने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में सामने आए ऐसे ही एक मामले के बाद हुई है। उस समय भी कई लोग बीमार पड़े थे और दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी। इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कराए गए जांच में भागीरथपुरा में हुई 21 मौतों में से 15 मौतों की वजह सीवेज मिले दूषित पानी से पाया गया। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर यह कहा था कि 10 मौतें दूषित पानी की वजह से हुई थीं।



21 लोगों की गई थी जान



सुदाम खाड़े ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि 15 मौतें दूषित पानी से होने वाले दस्त और उससे जुड़े लक्षणों की वजह से हुई थीं। उन्होंने कहा था कि दो मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है, जबकि बाकी चार मौतें किडनी फेलियर और कार्डियक अरेस्ट जैसे कारणों से हुई थीं। इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज (MGM) के डॉक्टरों द्वारा की गई जांच रिपोर्ट मंगलवार को मध्य प्रदेश सरकार को सौंप दी गई। इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट में एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि जांच का मकसद यह पता लगाना था कि दूषित पीने का पानी पीने से कितनी मौतें हुई हैं।



सरकार ने 18 मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये की एक्स-ग्रेशिया सहायता दी है और साफ किया है कि यह मदद मानवीय आधार पर दी गई है। हालांकि, ज़िला प्रशासन का कहना है कि इनमें से सिर्फ 10 मौतों का ही सीधा संबंध दूषित पानी से था।
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