यूपी में 2003 की सूची में नाम न होने पर वंशावली देखेंगे एईआरओ, घर वाले भी दे सकेंगे नोटिस का जवाब
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/23/article/image/VoterList-1769075654797-1769173327626_m.webp2003 की सूची में नाम न होने वाले लोगों की वंशावली देखेंगे एईआरओ।
जागरण संवाददाता, रायबरेली। एसआईआर (मतदाता प्रगाढ़ पुनरीक्षण) अभियान में बिना मैपिंग वाले लोगों की सुनवाई जारी है। 40 से अधिक स्थानों पर 207 एईआरओ ने करीब आठ हजार पांच सौ लोगों के दस्तावेज की जांच की। कई मामलों में 2003 के मतदाता न होने वाले लोगों की वंशावली की जांच होगी। सही पाए जाने पर ही उनको मतदाता बनाया जाएगा।
जनपद में दो लाख 32 हजार लोगों को नोटिस भेजने का काम जारी है। जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाया है, ऐसे में 21 जनवरी से जिन-जिन लोगों को अब तक नोटिस भेजा जा चुका है, उनकी सुनवाई शुरू हो गई। यह प्रक्रिया छह फरवरी तक चलेगा।
बिना मैपिंग वाले लोग चुनाव आयोग के पोर्टल पर भी नोटिस की जानकारी कर सकता है। इसमें वृद्ध-बीमार लोगों के घर वाले भी नोटिस का जवाब दे सकेंगे। इसमें एसआईआर का अलग से कॉलम बनाया गया है। मतदाता कार्ड संख्या डालकर यह देखा सकता है कि नोटिस आई है या नहीं।
ऑनलाइन जवाब देने के लिए प्रमाण पत्र के रूप में पासपोर्ट, जन्म, निवास व शैक्षिक अभिलेख सहित 13 दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज दे सकेंगे। अगर किसी मतदाता का जन्म एक जुलाई 1987 से पूर्व हुआ है तो उसे सिर्फ अपना दस्तावेज देना होगा।
अगर एक जुलाई 1987 के बाद और दो दिसंबर 2004 से पहले हुआ है तो अपने व पिता के दस्तावेज देने होंगे। वहीं दो दिसंबर 2004 के बाद जिन लोगों का जन्म हुआ है उन्हें अपने साथ पिता व माता के भी दस्तावेज देने होंगे। इस तरह बिना मैपिंग वालों की वंशावली की जांच हो सकेगी।
सामान्य निवास प्रमाणपत्र नही होगा मान्य
भारत सरकार द्वारा जारी 13 दस्तावेजों की सूची में स्थाई निवास प्रमाणपत्र है, लेकिन सामान्य निवास प्रमाणपत्र नहीं है। इसलिए सामान्य निवास प्रमाण पत्र मान्य नहीं है। इसके बावजूद नोटिस मिलने वाले कई लोग दस्तावेज में सामान्य निवास प्रमाण पत्र जमा कर रहे हैं। सामान्य निवास प्रमाणपत्र किसी स्थान पर 5-6 माह रहने पर ही जारी हो जाता है।
सत्यापन के बाद जुड़ेगा नाम
एसआईआर के तहत नो मैपिंग वाले लोगों को मिली नोटिस की सुनवाई हो रही है। एईआरओ नोटिस प्राप्तकर्ता के दस्तावेजों की प्रमाणिकता की जांच कर रहे हैं। इसके बाद सभी दस्तावेजों को सत्यापन के लिए आगे भेजा जाएगा। इसके बाद ही मतदाता सूची में नाम जोड़ा जा सकेगा।
Pages:
[1]