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बाइपोलर डिसआर्डर में तेजी से बदलता है रोगी का मूड, पांच लोगों की मौत का कारण बना अमीन भी इसका बताया जा रहा रोगी

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प्रतीकात्मक फोटो और अमीन का फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, सहारनपुर। सरसावा की कौशिक कालोनी में परिवार के पांच लोगों की मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। पूरी घटना को अंजाम देने वाला अमीन बाइपोलर डिसआर्डर बीमारी का शिकार बताया जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक बाइपोलर डिसआर्डर बेहद गंभीर बीमारी है, जिसमें पीड़ित का मूड बहुत तेजी से बदलता है। इसका समय पर उपचार आवश्यक है।
ये होते हैं बाइपोलर डिसआर्डर के लक्षण

डाक्टरों के अनुसार बाइपोलर डिसआर्डर में कुछ लोगों को उम्र बढ़ने के साथ-साथ मूड में तेजी से बदलाव और मानसिक स्थिति में सामान्य से ज्यादा उतार चढ़ाव होने लगता है। इसे उन्माद या हाइपोमेनिया भी कहा जाता है। ये बदलाव कुछ घंटों, दिनों से लेकर हफ्तों और महीनों तक रह सकते हैं। इसमें पीड़ित खुद को कभी बहुत ज्यादा उदास और कभी तो बहुत ज्यादा खुश महसूस करता है। इसकी वजह से वह चिड़चिड़ा हो जाता है।

यह मूड स्विंग नींद, ऊर्जा, गतिविधि, निर्णय, व्यवहार और स्पष्ट रूप से सोचने की क्षमता तक को प्रभावित कर सकते हैं। तरह की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को घरवालों के सपोर्ट और उनके साथ रहने की जरूरत होती है। इस समस्या से ग्रस्त व्यक्ति डिप्रेशन का भी शिकार हो सकता है। ऐसे में पीड़ित को जल्द उपचार न दिया जाए तो ये एक गंभीर बीमारी का रूप भी धारण कर सकती है।

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काम, करियर और रिश्तों को भी प्रभावित करता है बाइपोलर डिसऑर्डर

बाइपोलर डिसआर्डर से गस्त व्यक्ति की मानसिक स्थिति तेजी से बदलती है। कभी वह बहुत ही ज्यादा ऊर्जावान, आत्मविश्वासी और बहुत ही तेज बोलने वाला हो जाता है तो कभी बहुत ज़्यादा दुखी, थका हुआ और उदास हो जाता है। ये विकार पीड़ित के काम, करियर और रिश्तों को भी प्रभावित करता है।

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ये केमिकल हो सकते हैं कारण

न्यूरोट्रांसमीटर्स जैसे सेरोटोनिन, डोपामिन और नॉरएपिनेफ्रिन हर व्यक्ति के दिमाग में मौजूद होते हैं। ये व्यक्ति के मूड को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ उसके दिमाग में मौजूद इन केमिकल का स्तर बदलने लगता है।
जब ये केमिकल अंसतुलित होने लगते हैं तो बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण व्यक्ति में तेजी से दिखाई देने लग जाते हैं। बाइपोलर डिसआर्डर व्यक्ति की याददाश्त, निर्णय लेने की क्षमता और व्यवहार पर असर डालती है। साथ ही पीड़ित में डिमेंशिया होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

Disclaimer: यहां उल्लिखित जानकारी सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डाक्टर से सलाह लें।
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