यूपी में एक जिला एक व्यंजन योजना में कानपुर के समोसे और मोतीचूर लड्डू के ठाठ, जानें किस दुकान के प्रसिद्ध और क्या है खास
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/23/article/image/UP-ODOP-1769181112704_m.webpराहुल स्वीट्स का समोसा। कानपुर के लड्डू। दुकानदार
जागरण संवाददाता, कानपुर। UP ODOP Scheme: समोसा - कानपुर के समोसा और राजकिशोर स्वीटस के बड़ी बूंदी वाले मोतीचूर के लड्डू को प्रदेश सरकार की एक जिला एक व्यंजन योजना में कानपुर से शामिल किया गया है। बड़ी बूंदी वाले मोती चूर लड्डू बना रही पांचवीं पीढ़ी ने अब इस लड्डू का ब्रांड भी राजकिशोर बना लिया है और इसे दूसरे जिलों में भी ले जाने की तैयारी है।
कानपुर से जिस समोसा को एक जिला एक व्यंजन में शामिल किया गया है। इसमें जिस राहुल स्वीटस के समोसा को शामिल किया गया है वह दस तरह के विभिन्न मसालों की मदद से तैयार होता है। राहुल स्वीटस के संचालक अंकित गुप्ता ने बताया कि समोसा तो बहुत लोग बनाते हैं लेकिन ज्यादातर लोग केवल हल्दी- धनिया और आलू का प्रयोग करते हैं। लाल मिर्च का भी बहुत प्रयोग किया जाता है। हमारे यहां के समोसे की विशेषता इसका खास मसाला है जिसमें लाल मिर्च का प्रयोग अत्यंत कम है और हरी मिर्च से तीखा पन बढ़ाया जाता है। आठ से दस तरह के मसालों का एक मिश्रण है जिसे मिलाया जाता है।
शहर में राहुल स्वीटस के तीन सेंटर विजयनगर, पनकी और श्याम नगर हैं। इसके अलावा हमारे प्रतिष्ठान में कई तरह के विशेष लड्डू भी बनाए जाते हैं जिसमें रागी लडडू, अलसी लडडू, ज्वार लडडू और आटा लडडू , ड्राइफ्रूट के लड्डू मारवाड़ी लडडू , तिल लडडू, खजूर लडडू, गुड व सोंठ लडडू, मूंगदाल लड्डू , उड्द दाल लड्डू प्रमुख हैं। तीन दशक के दौरान ही शहर में तीन प्रतिष्ठान खोले गए हैं इससे कारोबारी सफलता और लोगों की पसंद का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मोतीचूर के लड्डू
शहर के घंटाघर से लगभग एक किमी दूरी पर स्थित काहू कोठी के पास बिकने वाले राजकिशोर ब्रांड के मोतीचूर लड्डू की विशेषता इसकी बड़ी बूंदी और विभिन्न मेवा का प्रयोग है। बड़ी बूंदी वाले इस मोतीचूर लड्डू को लोगों तक पहुंचानी वाली पांचवीं पीढ़ी के बनवारी राजकिशोर गुप्ता बताते हैं कि मोतीचूर लड्डू बनाने वाली इस दूकान की वह पांचवी पीढ़ी है। इसकी शुरुआत मेरे परबाबा के पिता डल्ला प्रसाद हलवाई ने की थी। देशी घी, बादाम, पिस्ता , इलायची , केसर जैसी खाद्य सामग्री के प्रयोग से इसका स्वाद लोगाें की जुबान पर चढ़ गया है। शहर में ऐसे प्रतिष्ठित परिवार हैं जिनके घर के सभी आयोजनों में हमारे यहां के लड्डू ही खाए और खिलाए जाते हैं। डल्ला प्रसाद, मैकूलाल और जवाहर की तीन पीढ़ी के बाद मेरे पिता राजकिशोर के नाम पर ब्रांड को पंजीकृत कराया गया है। अब पांचवी पीढ़ी में हम राजकिशोर ब्रांड से ही बड़ी बूंदी वाले मोतीचूर लड्डू 720 प्रति किलोग्राम की दर से बेच रहे हैं। इसका लाजवाब स्वाद ही पांच पीढ़ी से शहर के लोगों को पसंद आ रहा है।
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