LHC0088 Publish time 2 hour(s) ago

अब मधुमेह पीड़ित बच्चों को बार-बार नहीं लेना होगा इंजेक्शन, ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से मिलेगी राहत

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/23/article/image/insulin-1769184996623_m.webp



जागरण संवाददाता, पटना। प्रदेश में वयस्कों के साथ टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इन बच्चों को बार-बार इंसुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है। साथ ही पूर्ण विकास नहीं होने से शुगर स्तर तेजी से बढ़ता-घटता है। रात में अचानक शुगर स्तर कम हो जाता है और बच्चे को अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। ऐसे बच्चों को राहत देने के लिए अब प्राकृतिक पैंक्रियाज की तरह कार्य करने वाला विशेष आटोमेटेड इंसुलिन पंप आ गया है।

रिसर्च साेसायटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) के पूर्व अध्यक्ष मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कुमार ने बताया कि अत्याधुनिक ऑटोमेटेड इंसुलिन पंप टाइप-1 मधुमेह पीड़ित बच्चों के इलाज की नई उम्मीद है।

पटना के जिस पहले बच्चे को यह पंप लगाया गया है, उसका ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर हुआ है और वह अपनी पढ़ाई, खेलकूद व अन्य दैनिक गतिविधियां अधिक आत्मविश्वास से कर पा रहा है। साथ ही लंबे समय में आंख, किडनी व हृदय रोगों की आशंका भी कम हुई है। बताते चलें कि देश में 11.4 प्रतिशत लोग तो प्रदेश की करीब 14 प्रतिशत आबादी मधुमेह ग्रसित है।
अपने आप कम एडजस्ट करता इंसुलिन की मात्रा:

डॉ. सुभाष कुमार ने बताया कि टाइप-1 मधुमेह में शरीर इंसुलिन बनाना लगभग पूरी तरह बंद कर देता है। ऐसे बच्चों को जीवनभर दिन में तीन से पांच बार बाहर से इंसुलिन लेनी पड़ती है। दर्दनाक होने के साथ इससे ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव का खतरा भी अधिक रहता है। लगातार ब्लड शुगर असंतुलित रहने पर बार-बार अंगुली में प्रिक कर इंजेक्शन की जरूरत भी होती है। ऐसे बच्चों के लिए प्राकृतिक पैंक्रियाज की तरह इंसुलिन को संतुलित करने वाला आटोमेटेड इंसुलिन पंप काफी उपयोगी होता है।

अबतक यह किशोर, युवाओं व अन्य वयस्कों के लिए ही आता था। यह बहुत सेंसिटिव व स्मार्ट तकनीक है। यह सही ढंग से कार्य करे इसके लिए कंटीन्यूअस ग्लूकोज मानिटर (सीजीएम), इंसुलिन पंप व स्मार्ट एल्गोरिद्म को एक-दूसरे से जोड़ना पड़ता है। बच्चों में ब्लड शुगर तेजी से बदलता है इसलिए पंप को छोटे बच्चों की जरूरतों के अनुसार एडजस्ट करना चुनौतीपूर्ण था।

इसके अलावा बच्चों में लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) का खतरा अधिक होता है और यदि पंप या सेंसर में तकनीकी खराबी आए तो शुगर तेजी से गिर सकती है। यही कारण है कि डाक्टर बच्चों में इसे लगाने के लिए सुरक्षित व प्रमाणित सिस्टम की प्रतीक्षा कर रहे थे।

हाल में ही एफडीए व अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज एसोसिएशन जैसी संस्थाओं ने इसके सुरक्षित व प्रभावी होने पर मुहर लगाई है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन और न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन के अनुसार आटोमेटेड इंसुलिन पंप एचबीए1सी स्तर को औसतन 0.5–1 प्रतिशत तक कम करने के साथ गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया में कमी लाता है।
रियल-टाइम शुगर लेवल की मॉनिटरिंग:

बच्चे के पेट या हाथ में लगे सीजीएम सेंसर से हर 5 मिनट या एक से दो घंटे जैसा सेट किया जाए शुगर डेटा रिकॉर्ड करता है। यह 24 घंटे शुगर लेवल की निगरानी करता है। इसकी रिपोर्ट सीजीएम को मशीन से जोड़ कर डॉक्टर दे सकते हैं या महंगे सिस्टम में मोबाइल ऐप या पंप स्क्रीन पर देखा जा सकता है।

हालांकि, बच्चों व उनके स्वजन को इसके सही इस्तेमाल का प्रशिक्षण देना जरूरी है ताकि वे सेंसर या पंप में तकनीकी खराबी को पहचान कर तुरंत डाक्टर से परामर्श ले सकें।
Pages: [1]
View full version: अब मधुमेह पीड़ित बच्चों को बार-बार नहीं लेना होगा इंजेक्शन, ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव से मिलेगी राहत

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com