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इंजीनियर युवराज केस: अवैध खनन से लेकर अफसरों की मिलीभगत तक का हो रहा खुलासा, तीन महीने की अनुमति, वर्षों तक खनन

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युवराज मेहता की मौत के मामले में एक के बाद एक अधिकारियों की अनदेखी, उदासीनता व भ्रष्टाचार की रोज नई परत खुल रही हैं। फाइल फोटो



अजब सिंह भाटी, ग्रेटर नोएडा। सेक्टर 150 में बेसमेंट बनाने के लिए खोदे गए प्लाॅट में भरे पानी में कार समेत डूबने से साॅफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एक के बाद एक अधिकारियों की अनदेखी, उदासीनता व भ्रष्टाचार की रोज नई परत खुल रही हैं। जहां कार पानी में समाई, वहां बिल्डर ने 2017 में जिला प्रशासन से मिट्टी खनन का अनुमति ली थी। यह अनुमति तीन महीने तक ही मान्य थी, लेकिन बिल्डर इसकी आड़में 2022 से 2023 तक बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध खनन कराया। मिट्टी को दूसरी जगह बेचकर करोड़ों रुपये की कमाई की।
पुलिस से कई बार शिकायत की

जिला प्रशासन को राॅयल्टी न देकर प्रदेश सरकार को राजस्व का चुना लगाया। आश्चर्य की बात यह है कि दो करीब एक से सवा वर्ष प्लाट से अवैध खनन हुआ। पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी अवैध खनन को रोकने की थी, लेकिन दोनों ने ही अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। लोग नालेज पार्क थाना पुलिस पर अब बिल्डर से मिलीभगत कर अवैध खनन करने के आरोप लगा रहे हैं। सपा नेता उधम पंडित का कहना है कि पुलिस से कई बार शिकायत की थी, लेकिन पुलिस मूकदर्शन बनी है।
अवैध खनन रोकने के लिए कदम नहीं उठाया

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी अवैध खनन रोकने के लिए कदम नहीं उठाया। जांच में सामने आया है 2014 में नोएडा प्राधिकरण ने लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को भूखंड बेचाने के बाद 2020 में जमीन को लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से विजटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा खरीद लिया था। जांच में पता चला है कि भूखंड पर अभी भी लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन की शेयर होल्डिंग शेष है।
पर्यावरण से भी एनओसी लेना जरूरी

आरोपित बिल्डरों ने साल 2017 में बेसमेंट की खोदाई के लिए खनन विभाग से अनुमति ली थी, लेकिन उसकी आड में बेसमेंट की खोदाई का काम 2022 में शुरू हुआ। बेसमेंट की खुदाई करने वाले एक ठेकेदार नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कॉमर्शियल एवं आवासीय उपयोग के लिए बड़े निर्माण कार्य पर प्राधिकरण के लेआउट, स्वीकृत नक्शा के आधार पर एनओसी दी जाती है। 10 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्रफल में भवन निर्माण में मिट्टी खनन के लिए नक्शा के साथ स्वीकृति प्रदान करने से पहले पर्यावरण से भी एनओसी जरूरी होती है।
जिम्मेदारी बता अपना पल्ला झाड़ रहे

दरअसल, 10 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्रफल में भवन निर्माण में मिट्टी खनन के लिए नक्शा स्वीकृत करने के साथ ही पर्यावरण से भी एनओसी जरूरी है। पर्यावरण विभाग से अनुमति थी या नहीं । बेसमेंट की खुदाई के दौरान खनन मानक के अनुरूप हुआ या नहीं? संयुक्त निगरानी टीम ने कितनी बार निर्माण साइट पर छापेमारी की आदि सवालों का जवाब देने से अधिकारी न केवल बच रहे हैं, बल्कि दूसरे विभागों की जिम्मेदारी बता अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
एडीएम प्रशासन ने नहीं की बात

इस संबंध में जिला खनन अधिकारी उत्कर्ष त्रिपाठी से फोन के जरिए संपर्क किया गया उनका कहना है कि फिलहाल ड्यूटी एसआईआर में लगी है। मामला पुराना है। जानकारी एडीएम एवं प्राधिकरण स्तर से ही मिल सकती है। इस संबंध में एडीएम प्रशासन अतुल कुमार को काॅल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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