LHC0088 Publish time 1 hour(s) ago

Jharkhand News: दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, अब दोबारा नहीं करना पड़ेगा आवेदन

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/24/article/image/Land-Record-(1)-1769251513041_m.webp

दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में बदलाव। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद अब रैयतों को दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग झारभूमि सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा है।

अपग्रेडेशन के बाद यदि कोई प्रज्ञा केंद्र या साइबर कैफे से म्यूटेशन के लिए आवेदन की कोशिश करेगा, तो मौजा, प्लाट या खाता नंबर डालने के बाद भी आवेदन स्वीकार नहीं होगा।

भूमि सुधार उप समाहर्ता प्यारेलाल ने बताया कि रजिस्ट्री के साथ ही राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस) के माध्यम से सभी दस्तावेज स्वतः संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) के लॉग इन में उपलब्ध हो जाएंगे।

वर्तमान व्यवस्था में जमीन खरीदने के बाद रैयत दोबारा म्यूटेशन के लिए आवेदन कर देते हैं, जिससे आवेदन की पुनरावृत्ति हो जाती है। ऐसे मामलों में सीओ को एनजीडीआरएस से आए दस्तावेजों को अलग से खोजकर यह देखना पड़ता है कि म्यूटेशन का दोहरा आवेदन तो नहीं हुआ है, फिर उसे निरस्त करना पड़ता है। इससे समय की अनावश्यक बर्बादी होती है।

सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने के बाद न केवल अधिकारियों को राहत मिलेगी, बल्कि रैयतों के लिए भी प्रक्रिया सरल हो जाएगी। नई व्यवस्था अगले दो से तीन महीने में लागू होने की संभावना है।

दोबारा आवेदन पर रोक से विभाग को क्या होगा फायदा?

राजस्व विभाग का कहना है कि म्यूटेशन के रिपीट आवेदन से झारभूमि साइट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विभागीय आंकड़ों में स्वीकृत मामलों से अधिक रिजेक्ट केस दिखते हैं, जिससे विभाग की छवि प्रभावित होती है। नई व्यवस्था से सीओ का समय बचेगा और अनावश्यक रिजेक्शन में कमी आएगी।
म्यूटेशन सीओ से रिजेक्ट हुआ तो अब अपील अनिवार्य

नई व्यवस्था में यदि दाखिल-खारिज का मामला सीओ लागइन से रिजेक्ट होता है, तो रैयत दोबारा आवेदन नहीं कर सकेंगे। ऐसे मामलों में भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के पास अपील करनी होगी। डीसीएलआर से स्वीकृति मिलने के बाद ही सीओ म्यूटेशन करेंगे।

फायदा : सीओ को म्यूटेशन रद्द करने से पहले अधिक सावधानी बरतनी होगी। इससे निरस्तीकरण के मामलों में कमी आएगी और जमीन खरीदारों को लाभ होगा।
2008 से पहले के डीड पर म्यूटेशन पर लगेगी रोक

विभाग 2008 से पहले के डीड के आधार पर म्यूटेशन पर पाबंदी लगाने जा रहा है। नए सॉफ्टवेयर में इसके लिए ऑनलाइन आवेदन का विकल्प ही नहीं रहेगा। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग से पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।

फायदा : पुराने दस्तावेजों के आधार पर गलत तरीके से जमीन की खरीद-बिक्री और सरकारी जमीन की लूट पर रोक लगेगी।
पड़ोसी रैयत कर सकेंगे ऑनलाइन आपत्ति

झारभूमि सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने के बाद म्यूटेशन मामलों में संबंधित जमीन के पड़ोसी रैयत भी ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकेंगे। वे यह बता सकेंगे कि किस प्रकार की त्रुटि है या कौन से गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं। पहले यह अधिकार केवल हल्का कर्मचारी के पास था।

फायदा : सीओ को पड़ोसी रैयतों की आपत्तियों का भी निराकरण करना होगा। इससे जमीन खरीदार को आपत्तियों की जानकारी समय रहते मिल सकेगी।
सीओ लॉग इन से होगी त्रुटियों में सुधार की सुविधा

वर्तमान में एनजीडीआरएस से झारभूमि साइट पर दस्तावेज आने के बाद त्रुटियों में सुधार का कोई विकल्प नहीं है। अपग्रेडेड सॉफ्टवेयर में सीओ को त्रुटि सुधार का अधिकार दिया जाएगा।

फायदा : सीओ अपने स्तर से कई तकनीकी व दस्तावेजी त्रुटियां सुधार सकेंगे। इससे म्यूटेशन निरस्त होने की संख्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।

यह भी पढ़ें- रांची में भारतीय सेना की फायरिंग रेंज में लगी आग, रेस्क्यू में जुटा प्रशासन

यह भी पढ़ें- चतरा में मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़, कई फेमस ब्रांड के नकली बोतल जब्त, 6 गिरफ्तार
Pages: [1]
View full version: Jharkhand News: दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, अब दोबारा नहीं करना पड़ेगा आवेदन

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com