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ऋषिकेश से चंडीगढ़ तक जिंदगी की दौड़, मौसम, दूरी और वक्त की चुनौती के बीच PGI ने बचाईं दो जिंदगी

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पीजीआई की टीम ने ऋषिकेश से लीवर और पैंक्रियास लाकर दो गंभीर मरीजों की जान बचाई।



मोहित पांडे्य, चंडीगढ़। कभी-कभी जिंदगी बचाने की लड़ाई अस्पताल की चारदीवारी से कहीं आगे तक जाती है। कड़ाके की ठंड, लगातार बारिश, लंबा सड़क सफर और समय की सख्त पाबंदी...। इन तमाम चुनौतियों के बीच पीजीआई की टीम ने ऋषिकेश से लीवर और पैंक्रियास लाकर दो गंभीर मरीजों की जान बचा ली। यह पहली बार है जब एम्स ऋषिकेश से सड़क मार्ग से लीवर लाकर सफल ट्रांसप्लांट किया गया।

42 वर्षीय रघु पासवान को 16 जनवरी को दो मंजिला इमारत से गिरने के बाद गंभीर हालत में एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। गंभीर ब्रेन इंजरी के कारण डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा। इस घड़ी मेें परिवार ने अंगदान का साहसिक फैसला लिया, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में इलाज का इंतजार कर रहे मरीजों को नई जिंदगी मिल सकी।
रातभर का सफर, सुबह सर्जरी

पीजीआई की लिवर और पैंक्रियास ट्रांसप्लांट टीम 22 जनवरी की रात 9 बजे चंडीगढ़ से ऋषिकेश के लिए रवाना हुई। करीब छह घंटे के लंबे और थकाऊ सफर के बाद टीम सुबह 3 बजे एम्स ऋषिकेश पहुंची और सीधे आपरेशन थिएटर पहुंच गई।

सुबह 9 बजे अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई और दोपहर 12 बजे तक सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। इसके बाद तुरंत ग्रीन कारिडोर बनाकर अंगों को सड़क मार्ग से चंडीगढ़ लाया गया। दोपहर 3 बजे टीम पीजीआइ पहुंची और बिना समय गंवाए ट्रांसप्लांट सर्जरी शुरू कर दी गई।
12 घंटे की चुनौती में पैंक्रियास ट्रांसप्लांट

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पैंक्रियास बेहद संवेदनशील अंग होता है, जिसे 12 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट करना जरूरी होता है। इस चुनौती को पूरा करने के लिए पीजीआइ ने अलग-अलग टीमें बनाई। जहां एक टीम ऋषिकेश के एम्स में अंग निकाल रही थी।

वहीं, दूसरी टीम चंडीगढ़ में मरीज की सर्जरी की तैयारी कर रही थी। इस प्रयास से 28 वर्षीय युवती, जो बचपन से डायबिटीज से जूझ रही थी और रोज इंसुलिन पर निर्भर थी, को नया जीवन मिला। सर्जरी के बाद उसकी हालत तेजी से सुधर रही है।
प्रशासन और पुलिस का अहम योगदान

इस पूरे मिशन में अस्पताल प्रशासन, राज्य सरकारों और ट्रैफिक पुलिस की भूमिका भी बेहद अहम रही। कई जिलों से होकर गुजरने वाले काफिले के लिए ग्रीन कारिडोर बनाए गए, ताकि समय की एक-एक मिनट की बचत हो सके। पीजीआइ प्रशासन ने बताया कि चंडीगढ़, हरियाणा और उत्तराखंड पुलिस के बीच बेहतर तालमेल के बिना यह संभव हो पाया।
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