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उपहार अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल पर नया मामला, धोखाधड़ी और झूठी जानकारी देने पर चलेगा मुकदमा

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उपहार सिनेमा अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ नया मामला किया गया है दर्ज। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने शनिवार को उपहार सिनेमा अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट नवीनीकरण के दौरान आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने और झूठे हलफनामे देने के आरोपों में औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए।
व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी स्वीकारी

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने आइपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 177 (लोक सेवक को गलत सूचना देना), धारा 181 (शपथ पर झूठा बयान) और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत आरोप तय किए। आरोपों पर सुशील अंसल ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने की इच्छा जताई। अंसल अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत ने उनकी व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी स्वीकार कर ली। मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज करने के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
अग्निकांड में अपनी सजा की जानकारी छिपाई

दिसंबर 2025 में अदालत ने सुशील अंसल के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने वर्ष 2019 में अंसल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि अंसल ने पासपोर्ट के नवीनीकरण के दौरान वर्ष 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनी सजा की जानकारी छिपाई थी।
क्या उपहार सिनेमा कांड का पूरा मामला?

उपहार सिनेमा में 13 जून 1997 को फिल्म बॉर्डर की स्क्रीनिंग के दौरान लगी आग में 59 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में सुशील अंसल और उनके भाई गोपाल अंसल को लापरवाही से मौत का दोषी ठहराया गया था। दोनों भाइयों को एक-एक वर्ष जेल की सजा हुई थी। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने उन पर 60 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जिससे राजधानी में ट्रामा सेंटर बनाया जाना था।
बोले-लगातार जवाबदेही से बचने की कोशिश

अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उपहार त्रासदी पीड़ित संघ (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह कोई अलग-थलग मामला नहीं है, बल्कि यह सुशील अंसल के खिलाफ तीसरा आपराधिक मामला है, जिसमें वह लगातार जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हर बार उम्र का हवाला देकर रियायत दी जाती है, जबकि सच्चाई यह है कि न्यायिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करते समय वह 64 वर्ष के थे और पासपोर्ट नवीनीकरण के दौरान झूठी जानकारी देते समय 74 वर्ष के। आखिर कब तक एक व्यक्ति बार-बार अपराध करता रहेगा और जवाबदेही से बचता रहेगा?”

नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा कि सुशील अंसल न केवल उफहार कांड में दोषी ठहराए जा चुके हैं, बल्कि साक्ष्य से छेड़छाड़ के मामले में भी उन्हें सजा मिली है, जो न्याय व्यवस्था का खुला अपमान था।

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