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पुलिस का दबाव और... चश्मदीदों के बयान से उलझी इंजीनियर मौत की जांच, घंटों पूछताछ के बावजूद सवाल जस के तस

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सेक्टर 150 में जिस जगह युवराज की मौत हुई थी, वहां शनिवार को भी खड़े रहे लोग। जागरण



कुंदन तिवारी, नोएडा। युवराज मेहता की मौत को लेकर विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने प्राधिकरण, पुलिस व प्रशासन का पक्ष सुनने के बाद शनिवार को चश्मदीदों के बयान दर्ज किए। घटना का मुख्य चश्मदीद मुनेंद्र अपने पिता व भाई नरेंद्र के साथ दोपहर ढाई बजे प्राधिकरण कार्यालय पहुंचा।

उसने कहा कि एसआइटी को सब कुछ सच बताउंगा। दबाव में आकर बयान नहीं बदलुंगा। घटना स्थल के हालात और बचाव दल के प्रयासों के के बारे में उसने एसआइटी को जानकारी दी। सूत्र बताते हैं कि चश्मदीदों के बयान अधिकारिक दावों से टकराते नजर आए।

इससे प्राधिकरण, एसडीआरएफ, दमकल और पुलिस की मुश्किलें बढ़ सकती है। बताया जाता है कि चश्मदीदों के बयान विभागीय दावों से उलट है। मुनेंद्र ने पुलिस पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि वह हमारे पारिवारिक विवाद को रंजिश का आधार बनाकर जबरन दबाव बनाने की कोशिश में लगी है।

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आठ घंटे तक चली पूछताछ

करीब आठ घंटे तक जांच अधिकारियों ने आक्रामक लहजे में चश्मदीदों से पूछताछ की। वहीं नोएडा प्राधिकरण और पुलिस ने अपनी-अपनी विस्तृत रिपोर्ट विशेष जांच टीम (एसआइटी) को सौंप दी है।

प्राधिकरण ने जहां करीब 150 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर दी, वहीं पुलिस की रिपोर्ट का आकार 450 पन्नों तक पहुंच गया। इन रिपोर्टों में घटनाक्रम, कार्रवाई, ड्यूटी रोस्टर, कंट्रोल रूम रिकार्ड, काल डिटेल, रिस्पांस टाइम और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका का ब्यौरा शामिल होने का दावा किया गया है।

भारी-भरकम फाइलों के बावजूद जमीनी सवाल अब भी जस के तस हैं। दो घंटे तक युवराज को बाहर क्यों नहीं निकाला गया। मौके पर रेस्क्यू में देरी किस स्तर पर हुई। कंट्रोल रूम और फील्ड टीम के बीच तालमेल क्यों टूटा। इन अहम सवालों पर रिपोर्ट में स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने से बचाव नजर आ रहा है।

एसआइटी अब इन रिपोर्टों का बारीकी से विश्लेषण कर रविवार शाम को लखनऊ में अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है।

सूत्रों के अनुसार संकेत साफ हैं कि यदि रिपोर्ट में गोलमोल जवाब और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश सामने आई, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। क्योंकि युवराज मेहता की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बड़ी चूक मानी जा रही है।
भूखंड किसे, क्यों, किन शर्तों पर आवंटित किया

जांच टीम का पहला और सबसे बड़ा फोकस उस भूखंड के आवंटन पर रहा जहां हादसा हुआ। एसआइटी ने पूछा कि भूखंड किस उद्देश्य से आवंटित किया गया, निर्माण से पहले सुरक्षा मानकों की जांच क्यों नहीं हुई और खतरनाक स्थिति बनने के बावजूद प्राधिकरण ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। अधिकारियों को आवंटन से जुड़ी पूरी फाइल और शर्तों के पालन का रिकार्ड से संबंधित सवाल जवाब किए गए।
कब भरना शुरू हुआ पानी, किसे थी सबसे पहले जानकारी

एसआइटी ने पूछा कि भूखंड में पानी कब भरना शुरू हुआ और इसकी जानकारी किस अधिकारी को थी। जांच टीम ने इसे सीधी प्रशासनिक लापरवाही करार दिया। एसआइटी ने स्पष्ट किया कि यह देखा जाएगा कि हादसे के दौरान किन अधिकारियों के पास निर्णय लेने की जिम्मेदारी थी और उन्होंने क्या कार्रवाई की। तत्कालीन इंजीनियरिंग, परियोजना और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका जांच के केंद्र में है।

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