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पश्चिमी सिंहभूम में क्लर्क सस्पेंड, 16.54 लाख के गबन पर FIR की तैयारी

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लिपिक सस्पेंड। (सांकेतिक फोटो)



जागरण संवाददाता, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम के जिला के उपायुक्त चंदन कुमार ने गंभीर वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता के आरोप में निम्न वर्गीय लिपिक विवेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

साथ ही राजस्व राशि गबन के मामले में उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर कारणपृच्छा जारी की गई है।

आरोप है कि खूंटपानी अंचल में नाजिर के पद पर पदस्थापन के दौरान श्री विवेक कुमार द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 से दिसंबर 2024-25 तक वाहन ईंधन एवं कार्यालय व्यय मद में आवंटन से अधिक कुल ₹16,54,994 की राशि खर्च की गई। नोटिस दिए जाने के सात माह बाद भी उक्त राशि का हिसाब-किताब एवं प्रभार समर्पित नहीं किया गया।

इसके पूर्व उपायुक्त द्वारा गठित आरोप पत्र के आधार पर बिना सूचना मुख्यालय से अनुपस्थित रहने, कार्य में लापरवाही एवं स्पष्टीकरण नहीं देने के आरोप में उनके विरुद्ध लघु शास्ति के तहत ‘निन्दन’ दंड अधिरोपित कर सेवा पुस्तिका में अंकित करने का आदेश दिया गया था।

इसके अलावा आनंदपुर प्रखंड में पदस्थापन के दौरान कर्तव्यहीनता एवं अनुशासनहीनता के आरोप में झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2022 के तहत एक वर्ष तक वेतन वृद्धि रोकने की सजा भी दी गई है, जिसका संचयी प्रभाव होगा।

उपायुक्त ने विवेक कुमार, वर्तमान पदस्थापन प्रखंड हाटगम्हरिया, को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष समर्पित करने का निर्देश दिया है।
वेतन भुगतान में गड़बड़ी पर प्रधान लिपिक की वेतनवृद्धि दो वर्ष रोकी गई

वहीं, दूसरी ओर पश्चिमी सिंहभूम के जिला के उपायुक्त चंदन कुमार ने प्रखंड कार्यालय खूंटपानी के प्रधान लिपिक हलीम अख्तर के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई करते हुए उनकी अगली वेतन वृद्धि पर दो वर्ष तक संचायात्मक प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2022 के तहत की गई है।

आरोप है कि प्रधान लिपिक द्वारा जनसेवक परमेश्वर गिरी की 22 नवंबर 2023 से 28 मार्च 2024 तक कारावास अवधि का वेतन विपत्र तैयार कर निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी को अंधकार में रखते हुए वेतन का भुगतान कर दिया गया, जबकि उक्त अवधि का सत्यापन जेल अधीक्षक, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा द्वारा किया गया था।

इससे जनसेवक को अनुचित वित्तीय लाभ मिला। साथ ही जनसेवक की सेवा पुस्त कार्यालय से गायब होने की जानकारी पूर्व से रहने के बावजूद पदाधिकारी को अवगत नहीं कराया गया और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की गई। जांच में आरोप सत्य पाए गए।

इसी क्रम में उपायुक्त ने राजस्व उपनिरीक्षक रामचंद्र तांती (सोनुआ) के विरुद्ध सरकारी कार्य में लापरवाही, बिना सूचना अनुपस्थिति, अनुशासनहीनता एवं स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर एक वर्ष के लिए असंचयात्मक प्रभाव से वेतन वृद्धि रोकने का लघु दंड अधिरोपित किया है।

इसके अतिरिक्त, अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत जनसेवक अशोक निषाद द्वारा एसएफसी गोदाम खूंटपानी का प्रभार नहीं सौंपने तथा निम्न वर्गीय लिपिक श्री लॉरेंस सामड पर राजस्व राशि गबन के मामले में कारणपृच्छा जारी की गई है। दोनों को एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष समर्पित करने का निर्देश दिया गया है।
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