Chikheang Publish time 2026-1-24 23:26:32

जम्मू-कश्मीर के डोडा में शहीद हुए जवान अजय लकड़ा का शव देखते ही मां हुई बेहोश, रांची में उमड़ा जनसैलाब

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रांची पहुंचा बलिदान जवान का शव। (जागरण)



जागरण संवाददाता, रांची। जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए जवान अजय लकड़ा का शव शनिवार को उनके पैतृक गांव लाबेद, नगड़ी पहुंचते ही पूरे गांव में मातम का माहौल बन गया।

जैसे ही जवानों ने शहीद के शव को उनके घर पहुंचाया और तिरंगा उनके माता के हाथ में दिया, शहीद की मां भावुक होकर बेहोश हो गई।

शहीद के घर के बाहर सुबह से ही सैकड़ों लोग मौजूद थे, जो शहीद के सम्मान में अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे थे। शव के आने के साथ ही लोगों ने जोर-जोर से अजय लकड़ा अमर रहे के नारे लगाए। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और हर कोई नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई देने में शामिल हुआ।

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रोते-बिलखते परिजन।

शहीद के शव को घर से शाम लगभग पांच बजे लाबेद स्थित मसना में ले जाया गया। अंतिम यात्रा के दौरान पैदल और बाइक से सैकड़ों लोग शामिल हुए। लोगों की लाइन लगभग पांच किलोमीटर से अधिक लंबी थी। गांव के लोग गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रोते नजर आए।
खिजरी और हटिया विधायक पहुंचे गांव

इस मौके पर खिजरी और हटिया विधानसभा के विधायक भी मौजूद रहे और शहीद को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। शव को पहले नामकुम स्थित शव गृह में रखा गया था और वहां से ओपन गाड़ी के माध्यम से गांव तक लाया गया। इस दौरान सेना के कई अधिकारी भी मौजूद थे और उन्होंने शहीद को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने की व्यवस्था सुनिश्चित की।
बहन की स्थिति हुई नाजुक

शहीद के परिवार में भी भारी शोक का माहौल था। शहीद की बहन अंजली का रो-रोकर बुरा हाल था। बहन की स्थिति नाजूक हो गई थी। पूरे गांव के लोग अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और मातम के दृश्य पूरे गांव में दिखाई दिए। शहीद अजय लकड़ा की बहादुरी और त्याग को याद करते हुए लोग उन्हें सलाम कर रहे थे। गांव में हर किसी की आंखें नम थीं।

लोग अपने हाथ जोड़कर शहीद के बलिदान को नमन कर रहे थे। ग्रामीणों ने कहा कि अजय लकड़ा का त्याग हमेशा उनके दिलों में जीवित रहेगा और उनकी शहादत गांव के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन और सेना ने भी व्यवस्था को पूरी तरह से नियंत्रण में रखा। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और सैन्य जवान तैनात थे।
सात साल पहले सेना में गया था अजय

अजय के घरवालों ने बताया कि सात साल पहले वह सेना में भर्ती हुआ था। उसने घर की सारी जिम्मेदारी अपने हाथों में ले रखी थी। वह जल्द ही शादी करने की योजना बना रहा था, लेकिन उससे पहले उसकी जान चली गई। गांव के लोग बताते हैं कि अजय लकड़ा जब भी गांव आता था, तो पूरे गांव में घूम-घूमकर लोगों से बातचीत करता था।

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