टीम नवीन में बढ़ सकता है मध्य प्रदेश का प्रभाव, जटिया सहित तीन नेता हैं राष्ट्रीय पदाधिकारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/jagran-photo-1769285278139_m.webpटीम नवीन में बढ़ सकता है मध्य प्रदेश का प्रभाव (फाइल फोटो)
जेएनएन, भोपाल। भाजपा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है। अब तक मध्य प्रदेश से संसदीय बोर्ड में अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेता सत्यनारायण जटिया सदस्य हैं।
इसके अलावा ओमप्रकाश धुर्वे राष्ट्रीय सचिव और लाल सिंह आर्य अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं। जेपी नड्डा की टीम में कैलाश विजयवर्गीय भी राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं, लेकिन दो वर्ष पूर्व वह राज्य में मंत्री बना दिए गए।
पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय कमेटी में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव एक साथ रहे हैं। एक समय थावर चंद्र गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर दोनों ही राष्ट्रीय महासचिव थे। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है।
मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में काबिज है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं।
कुशाभाऊ ठाकरे, प्यारेलाल खंडेलवाल और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गज मध्य प्रदेश की राजनीति से ही देशभर में लोकप्रिय हुए। भाजपा के लिए सुरक्षित सीटों में शुमार विदिशा लोकसभा सीट तो ऐसी रही है कि वहां से अटल बिहारी वाजपेयी और सुषमा स्वराज जैसे बड़े नेताओं को भाजपा ने चुनाव लड़वाया।
इस कारण से भी राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है। पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है।
लोकसभा की सभी 29 सीटें भाजपा के खाते में
मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां की सभी 29 सीटें 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जीती हैं। अब बड़ी चुनौती इन्हें बरकरार रखने की है। नई सदी में केवल वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव ही ऐसा था, जिसमें भाजपा बहुमत से थोड़ी दूर रह गई थी। अब आने वाले 2028 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने चुनौतियां और बढ़ने वाली हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा को संगठन को और अधिक मजबूत करना होगा।
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