सुप्रीम कोर्ट के जज का बड़ा सवाल, सरकार के खिलाफ फैसला देने पर ही जजों का तबादला क्यों? कॉलेजियम पर कही ये बात
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/jagran-photo-1769286385845_m.webpजजों के तबादले में कार्यपालिका के दखल पर सुप्रीम कोर्ट के जज ने उठाए सवाल (फाइल फोटो)
आईएएनएस, पुणे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने हाईकोर्ट के जजों के तबादलों में कार्यपालिका (सरकार) के कथित दखल पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अगर जजों को सरकार के खिलाफ दिए गए फैसलों के कारण इधर-उधर किया गया, तो इससे न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंचेगा।
पुणे के आइएलएस ला कॉलेज में एक व्याख्यान के दौरान जस्टिस भुइयां ने सवाल उठाया कि किसी जज को सिर्फ इसलिए दूसरे हाईकोर्ट में क्यों भेजा जाए, क्योंकि उसने सरकार के खिलाफ कुछ “असुविधाजनक\“\“ आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा असर पड़ता है।
हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जस्टिस भुइयां की टिप्पणी अक्टूबर 2025 में उस घटनाक्रम पर इंगित थी, जिसमें कालेजियम ने जस्टिस अतुल श्रीधरन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से स्थानांतरित करके छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भेज दिया गया था।
जस्टिस भुइयां ने साफ कहा कि जजों की नियुक्ति और तबादले में कार्यपालिका की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। तबादलों का इस्तेमाल जजों को सजा देने के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता।
उन्होंने हाल के एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि जब कॉलेजियम किसी जज के तबादले के प्रस्ताव में केंद्र सरकार के अनुरोध को दर्ज करता है, तो यह एक स्वतंत्र संवैधानिक प्रक्रिया में सरकार के दखल को दिखाता है। इससे उस व्यवस्था की मूल भावना कमजोर होती है, जिसे राजनीति और दबाव से दूर रखने के लिए बनाया गया है।
उन्होंने जजों से बिना डर और बिना किसी पक्षपात के काम करने की अपील की और कहा कि न्यायाधीशों की पहली जिम्मेदारी संविधान के प्रति होती है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की बुनियादी विशेषता है और इसकी रक्षा करना जजों का कर्तव्य है।
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