अबूधाबी में वार्ता के बीच यूक्रेन पर बरसीं रूसी मिसाइलें, 10 लाख यूक्रेनी हुए बिजली से वंचित; एक की मौत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/war-1769299743090_m.webpअबूधाबी में वार्ता के बीच यूक्रेन पर बरसीं रूसी मिसाइलें (फोटो- रॉयटर)
रॉयटर, कीव। अमेरिका की मध्यस्थता में युद्ध की समाप्ति पर रूस और यूक्रेन की वार्ता अबूधाबी में शनिवार को दूसरे दिन संपन्न हुई। रूस और यूक्रेन ने वार्ता को सकारात्मक बताते हुए भविष्य में भी बातचीत की संभावना जताई है। कुछ घंटे बाद अमेरिका ने दोनों देशों के नेताओं से बात कर अगली त्रिपक्षीय वार्ता एक फरवरी (रविवार) को होने की सूचना दी है।
इस बीच मास्को पहुंचकर अमेरिकी दूत स्टीव विटकाफ और अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर ने युद्ध समाप्ति पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से चार घंटे वार्ता की है। लेकिन शुक्रवार-शनिवार की रात रूस के बड़े हमले से दोनों पक्षों बातचीत से बने सकारात्मक माहौल को झटका लगा है।
रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों को भारी नुकसान हुआ है जिससे भीषण ठंड के मौसम में 10 लाख से ज्यादा लोग बिजली की आपूर्ति से वंचित हो गए हैं। इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई है और 31 लोग घायल हुए हैं। यूक्रेन ने इस हमले की कड़ी निंदा की है।
यूएई की राजधानी अबूधाबी में तीनों देशों के अधिकारियों की वार्ता में कोई निर्णय नहीं हुआ और न ही संयुक्त बयान जारी हुआ। यूएई ने वार्ता को सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण बनाने वाला बताया है। लेकिन कीव में यूक्रेन ने एक बार फिर डोनबास (लुहांस्क और डोनेस्क) की नियंत्रण वाली अपनी जमीन छोड़ने से इन्कार किया है जबकि रूस पूरे डोनबास से कम लेने पर तैयार नहीं है।
रूस ने युद्ध खत्म करने के लिए डोनबास को पूरी तरह से छोड़ने की शर्त यूक्रेन के समक्ष रखी है। वैसे चार वर्षों के युद्ध में उद्योग और खनिज संपन्न डोनबास की 90 प्रतिशत जमीन पर रूस कब्जा कर चुका है।
अबूधाबी में शनिवार की वार्ता से पहले रात में रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और दूसरे बड़े शहर खार्कीव पर मिसाइल और ड्रोन के बड़े हमले किए। लड़ाई में रूसी सेना ने शनिवार को यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी भाग के एक और गांव पर कब्जा कर लिया है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने ताजा हमलों को बर्बर बताया है। कहा, ये मिसाइलें हमारे लोगों के साथ ही वार्ता की टेबल पर भी गिरी हैं जिनका नुकसानदायक असर होना तय है। विश्लेषकों का मानना है कि रूसी हमलों के बावजूद यूक्रेन वार्ता की टेबल से हटने की स्थिति में नहीं है।
यूक्रेन पर युद्ध समाप्ति के लिए अमेरिका का जबर्दस्त दबाव है तो नाटो के भीतर की तनावपूर्ण स्थिति के चलते यूरोपीय सहयोगी अब यूक्रेन को अपेक्षित सैन्य सहायता दे पाने की स्थिति में नहीं हैं। दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की जल्द युद्ध समाप्ति के पक्ष में बयान दे चुके हैं। ऐसे में अब रूस स्थिति का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहता है।
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