cy520520 Publish time 2026-1-25 07:57:27

गोरखपुर फर्जी कॉल सेंटर: पहले भी पुलिस को था संदेह, क्यों अधूरी रह गई थी जांच

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/callcenter_-1769307999824_m.webp

पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया है। जागरण



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। कॉल सेंटर के सक्रिय रहने के दौरान ही एक बार स्थानीय पुलिस को संचालक की गतिविधि पर संदेह हुआ था। इसी संदेह के आधार पर तत्कालीन थानेदार मौके पर जांच के लिए पहुंचे भी थे, लेकिन उस समय कोई ठोस सबूत हाथ न लगने की बात कहकर पुलिस टीम वापस लौट आई थी।

बाद में वही कॉल सेंटर अमेरिका के नागरिकों से साइबर ठगी का बड़ा अड्डा निकला। इस बीच पुलिस ने फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज कर दी है। एक टीम को कोलकाता रवाना किया गया है, जहां नेटवर्क के अहम सूत्र होने की जानकारी मिली है।

सूत्रों के मुताबिक जिस समय पुलिस ने शुरुआती जांच की थी, उस वक्त बाहर से पूरी गतिविधि सामान्य दिखाई दे रही थी। न तो बड़ी आवाजाही थी और न ही कोई ऐसी हलचल, जिससे सीधे तौर पर साइबर ठगी का संदेह पुख्ता हो सके। कालिंग रात के समय होती थी और दिन में मकान लगभग शांत रहता था। इसी वजह से उस समय जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उस दौर में न तो कोई तकनीकी इनपुट उपलब्ध था और न ही विदेशी कालिंग या संदिग्ध बैंक लेनदेन से जुड़ा कोई ठोस संकेत मिला था। सीमित जानकारी के आधार पर कार्रवाई संभव नहीं थी। हालांकि, बाद में जब पुख्ता सूचना, डिजिटल साक्ष्य और साइबर सेल से मिले तकनीकी इनपुट सामने आए, तब गुरुवार को छापेमारी कर फर्जी काल सेंटर का भंडाफोड़ किया गया और संचालक समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।

यह भी पढ़ें- गोरखपुर में फर्जी कॉल सेंटर पर ईडी की नजर, विदेशी धन के पूरे नेटवर्क की होगी जांच

पुलिस का मानना है कि कोलकाता कनेक्शन की गुत्थी सुलझने के बाद साइबर ठगी नेटवर्क की कई अहम कड़ियां खुल सकती हैं। कार्रवाई के बाद करीमनगर स्थित उस मकान पर ताला लगा दिया गया है, जहां फर्जी कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अब बहुस्तरीय हो चुकी है और हर उस बिंदु की पड़ताल की जा रही है, जहां लापरवाही या सूचना के अभाव में साइबर ठगी का यह अड्डा लंबे समय तक फलता-फूलता रहा।
Pages: [1]
View full version: गोरखपुर फर्जी कॉल सेंटर: पहले भी पुलिस को था संदेह, क्यों अधूरी रह गई थी जांच