Maharashtra: उद्धव ठाकरे के 2 पार्षद ‘लापता’, शिवसेना ने की शिकायत, घरवालों को भी नहीं मालूम
महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजे 16 जनवरी को आए थे, लेकिन सबसे ज़्यादा चर्चा कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) को लेकर हुई। यहां नतीजों के बाद काफी राजनीतिक उठापटक देखने को मिली। इस हलचल ने बृहन्मुंबई नगर निगम से भी ज़्यादा लोगों का ध्यान खींचा। इसकी सबसे बड़ी वजह सत्ताधारी दलों के बीच अंदरूनी टकराव रहा। KDMC में असली मुकाबला सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच नहीं, बल्कि गठबंधन के अंदर ही देखने को मिला। एक तरफ कल्याण के सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) थी, तो दूसरी तरफ उसके सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) थी, जिसका राज्य स्तर पर नेतृत्व रविंद्र चव्हाण कर रहे हैं। चुनाव के दौरान विपक्षी दल ज्यादा असर नहीं दिखा पाए, लेकिन अब उनकी सीटें काफी अहम हो गई हैं, क्योंकि वही तय करेंगी कि नगर निगम पर किसका कब्जा होगा।शिवसेना को मिली हैं सीटें
122 सदस्यों वाली KDMC में किसी भी दल को साफ बहुमत नहीं मिला। शिवसेना (शिंदे गुट) को 53 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी 50 सीटों के साथ उसके करीब रही। बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत है। ऐसे में कोई भी पार्टी तुरंत सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकी। अब छोटी पार्टियों और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे अहम हो गई है। KDMC की राजनीति में पहला बड़ा बदलाव तब देखने को मिला, जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता राजू पाटिल ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी या शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के साथ जाने के बजाय, अपने पांच पार्षदों के साथ शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को समर्थन देने का ऐलान कर दिया।
संबंधित खबरें
Delhi AQI: दिल्लीवालों ने हफ्तों बाद ली सुकून की सांस! AQI में भारी गिरावट के बाद GRAP-III हटा; जानें अपने इलाके का हाल अपडेटेड Jan 25, 2026 पर 7:39 AM
Jammu and Kashmir: कश्मीर में बर्फीले तूफान का कहर, 100 से ज्यादा घरों को पहुंचा नुकसान अपडेटेड Jan 24, 2026 पर 9:53 PM
तमिलनाडु : हिस्ट्रीशीटर को छुड़ाने के लिए पुलिस वैन पर बम से हमला, गरमाई राज्य राजनीति अपडेटेड Jan 24, 2026 पर 8:54 PM
शिंदे के पास 58 पार्षद
इस फैसले के बाद शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 58 पार्षदों तक पहुंच गई। अब वह बहुमत के आंकड़े से सिर्फ तीन सीट पीछे रह गई और साफ तौर पर आगे नजर आने लगी। इसके बाद ठाकरे गुट में हलचल तेज हो गई। पार्टी के KDMC जिला प्रमुख शरद पाटिल ने पुलिस से संपर्क कर दो पार्षदों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। बाद में सूत्रों ने बताया कि ये दोनों पार्षद शिंदे गुट के संपर्क में थे। बताया जा रहा है कि ठाकरे गुट के कुल 11 पार्षदों में से दो का कोई पता नहीं चल पा रहा है। वहीं दो अन्य पार्षद स्वप्नाली केने और राहुल कोट कथित तौर पर MNS के संपर्क में हैं। बाद में शरद पाटिल ने साफ किया कि पुलिस में दी गई शिकायत सिर्फ उन्हीं दो पार्षदों को लेकर थी, जिनके शिंदे गुट से जुड़े होने की आशंका थी।
इसके बाद KDMC में राजनीतिक समीकरण और भी बदल गए। कल्याण से सांसद और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को अब NCP (शरद पवार गुट) के एक पार्षद और कांग्रेस के दो पार्षदों का समर्थन मिलने की खबर है। इससे शिंदे गुट की कुल सीटें बढ़कर 65 हो गई हैं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी ज्यादा हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी अभी भी 50 सीटों पर ही टिकी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सात पार्षद अभी भी शिंदे गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। अगर ये सभी पार्षद भी पाला बदल लेते हैं, तो शिंदे के नेतृत्व वाले समूह की संख्या 72 तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में, राज्य सरकार में अहम साझेदार होने के बावजूद बीजेपी की स्थिति कमजोर हो सकती है।
Pages:
[1]