cy520520 Publish time 2 hour(s) ago

इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी, लिव इन में रिश्ते टूटने के बाद दर्ज कराए जाते हैं दुष्कर्म के केस

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/HC_News-1769316243311_m.webp

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में आजीवन कारावास की सजा रद करते हुए कहा है कि पश्चिमी विचारों और लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा के प्रभाव में युवाओं में बिना विवाह किए साथ रहने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। जब ऐसे संबंध टूटते हैं तो दुष्कर्म की एफआइआर दर्ज कराई जाती है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा (प्रथम) की खंडपीठ ने कहा, चूंकि कानून महिलाओं के पक्ष में हैं, इसलिए पुरुषों को उन कानूनों के आधार पर दोषी ठहराया जाता है, जो उस समय बनाए गए थे जब लिव-इन रिलेशनशिप की अवधारणा अस्तित्व में ही नहीं थी। विशेष न्यायाधीश( पोक्सो अधिनियम) महाराजगंज द्वारा मार्च 2024 में अपीलार्थी चंद्रेश को दी गई सजा और आजीवन कारावास सहित दोषसिद्धि आदेश रद करते हुए कोर्ट ने उक्त टिप्पणियां की।

अपीलार्थी को आईपीसी की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया था। अभियोजन का कहना था कि अपीलार्थी शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर बेंगलुरु ले गया और वहां शारीरिक संबंध स्थापित किए। हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता बालिग थी और ट्रायल कोर्ट ने अस्थि परीक्षण रिपोर्ट पर ठीक से विचार नहीं किया था, जिसमें उम्र लगभग 20 वर्ष साबित हुई थी।

यह भी पढ़ें- इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त आदेश, कहा-यथासंभव मूल चक में छेड़-छाड़ कर आवंटन न करें

पीठ ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत विद्यालय के रिकॉर्ड किशोर न्याय नियमों के अनुसार दस्तावेजी रूप से मान्य नहीं थे। मां (गवाह-1) द्वारा बताई गई उम्र में भी विसंगतियां मिलीं। एफआइआर में मां ने उम्र 18-1/2 साल बताई थी। बयान में पीड़िता ने स्वीकार किया था कि वह स्वेच्छा से अपना घर छोड़कर अपीलार्थी संग पहले गोरखपुर और फिर बेंगलुरु गई थी।
Pages: [1]
View full version: इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी, लिव इन में रिश्ते टूटने के बाद दर्ज कराए जाते हैं दुष्कर्म के केस

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com