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दो साल भी नहीं टिक सका कस्तूरबा विद्यालय का नया भवन, टूटे दरवाजे और भरे शौचालय दे रहे बदहाली की गवाही

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दो साल भी नहीं टिक सका कस्तूरबा विद्यालय



संवाद सूत्र, चांदन (बांका)। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इंटरस्तरीय कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय +2 चांदन (टाइप–3) की हालत महज दो वर्षों में ही जर्जर हो गई है। वर्ष 2024-25 में दो अक्टूबर को संवेदक द्वारा विद्यालय का हैंडओवर किया गया था, लेकिन अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए कि भवन की बुनियादी सुविधाएं जवाब देने लगी हैं। इसका सीधा असर यहां अध्ययनरत छात्राओं पर पड़ रहा है।

विद्यालय के शौचालय की टंकी पूरी तरह भर चुकी है, जिससे शौचालयों का उपयोग मुश्किल हो गया है। कई दरवाजे टूट चुके हैं और शौचालयों में लगी अधिकांश नलें क्षतिग्रस्त पड़ी है।

जहां शौचालय की टंकी बनाई गई है, वहां गड्ढे में मोरम मिट्टी से भराई नहीं किए जाने के कारण समस्या और गंभीर हो गई है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जैसे-तैसे निर्माण कर विद्यालय को हैंडओवर किया

विद्यालय की वार्डन अन्ना लकड़ा ने बताया कि संवेदक द्वारा जैसे-तैसे निर्माण कर विद्यालय को हैंडओवर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि परिसर में एक भी हैंडपंप नहीं है। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर पानी की भारी किल्लत हो जाती है, जिससे छात्राओं के दैनिक कार्य प्रभावित होते हैं।

वार्डेन ने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 173 छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव और संसाधनों की कमी से छात्राओं के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी संवेदक पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो और छात्राओं को सुरक्षित व बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
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