आनलाइन गेमिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़; बठिंडा पुलिस ने दो आरोपित दबोचे, नेटवर्क उजागर
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/7A-1769327835977_m.webpआनलाइन गेमिंग के नाम पर चल रही थी ठगी।
जागरण संवाददाता, बठिंडा। आनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का बठिंडा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें दो बिजनेसमैन भी शामिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मौके से दो आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
कोतवाली थाना बठिंडा के सहायक थानेदार कुलविंदर सिंह ने बताया कि जिला पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर में एक गिरोह फर्जी आनलाइन गेमिंग एप के जरिए लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहा है। सूचना के अनुसार गिरोह के कुछ सदस्य बठिंडा के होटल अरमान में ठहरे हुए थे और वहीं से इस ठगी को अंजाम दे रहे थे।
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सूचना के बाद होटल अरमान में छापेमारी
सूचना के आधार पर गठित विशेष पुलिस टीम ने होटल अरमान में छापामारी की। इस दौरान कमरे नंबर 107 से जसबीर सिंह निवासी खैरथल (राजस्थान) और यहिया खान निवासी जिला मेवात (राजस्थान) को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान आरोपितों के पास से विभिन्न कंपनियों के 13 मोबाइल फोन और दो कार्ड स्वैप मशीनें बरामद की गईं।
पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने खुलासा किया कि वे राजू उर्फ सरपंच के अलावा गुरुग्राम स्थित एसके टेक्सटाइल कंपनी और हकन बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर के मालिकों के साथ मिलकर इस फर्जीवाड़े को चला रहे थे। आरोपितों ने बताया कि उन्होंने एक फर्जी आनलाइन गेमिंग एप तैयार करवाई थी, जिसमें यैनो गेम सहित अन्य कई गेम के स्लॉट बनाए गए थे।
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शुरुआत में कम पैसे लगवाते थे आरोपित
गिरोह की कार्यप्रणाली के अनुसार, शुरुआत में खिलाड़ियों से कम रकम लगवाकर ऑटो मोड के जरिए जानबूझकर उन्हें जिताया जाता था, जिससे उनका भरोसा जीता जा सके। जैसे ही खिलाड़ी अधिक धनराशि लगाना शुरू करते थे, कंप्यूटर सेटिंग बदलकर उन्हें लगातार हराया जाता था और पूरी राशि हड़प ली जाती थी।
आरोपितों ने यह भी स्वीकार किया कि ठगी की रकम छिपाने के लिए अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए गए थे। साइबर निगरानी से बचने के लिए एप का आईपी एड्रेस विदेश का दिखाया जाता था और बड़ी रकम की ठगी के बाद एप को बंद कर नई एप लॉन्च कर दी जाती थी।
पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने सैकड़ों लोगों को ठगा है और ठगी की रकम करोड़ों रुपये तक पहुंचने की आशंका है। गिरफ्तार आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
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