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राज चौहान हत्याकांड: रसूखदार परिवार, 35 साल तक रही प्रधानी; 14 बीघा जमीन के लिए कर दी थी दादा की हत्या

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जागरण संवाददाता, आगरा। रंगबाजी और दबंगई करने वाले राज चौहान का परिवार रसूखदार रहा है।सादाबाद के बेदई गांव की प्रधानी उसके परिवार में 35 वर्ष तक रही है। परिवार की पहचान हाथी वाले और कोठी वाले के नाम से है।14 बीघा जमीन के लिए राज ने अपने दादा की हत्या कर दी थी। इसके बाद से उसकी हरकतों से परिवार वाले परेशान थे। उसकी हत्या की खबर मिलने के बाद पूरा परिवार दुखी है। परिवार के कुछ लोग कालिंदी विहार स्थित घर पर भी पहुंचे थे।
हाथी वालों के नाम से है आसपास के गांवों में परिवार की पहचान

हाथरस के सादाबाद में बेदई के रहने वाले राज चौहान के पिता विजयवीर की वर्ष 2016 में बीमारी से मृत्यु हो गई थी। परिवार के लोगों ने बताया कि इसके बाद राज और उसके भाई हर्ष को लेकर उनकी मां नीरज अपने मायके नगला ताज में रहने लगीं। कुछ दिन बाद वे यहां से नाऊ की सराय में रहने चली गईं।

वर्ष 2022 में राज को जानकारी हुई कि उसके दादा उदयवीर सिंह ने चाचा जयवीर सिंह के नाम पूरी संपत्ति कर दी है। इससे बौखलाकर उसने दादा की गोली मारकर हत्या कर दी। पांच दिन बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर मामले का पर्दाफाश कर दिया।
14 बीघा खेत के लिए राज ने कर दी थी दादा की हत्या

जयवीर ने हत्या का मुकदमा लिखाया था। मगर, दस माह बाद राज के भविष्य को देखते हुए उन्होंने समझौता कर लिया। इसके बाद वह मुकदमे से छूट गया।राज के दादा उदयवीर सिंह चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उने सबसे बड़े भाई रनवीर सिंह वर्ष 1974 में निर्वरोध ग्राम प्रधान बने। इसके बाद प्रधानी उनके परिवार में ही रही। उनके बाद छोटे भाई बलवीर और उनकी पत्नी लज्जादेवी प्रधान रहीं। इस तरह परिवार में वर्ष 2008 तक प्रधानी रही।

राज के दादा उदयवीर सिंह के पिता पंचम सिंह के समय में घर में हाथी रहता था और तभी की गांव में कोठी है। इसलिए परिवार को कोठी वाले और हाथी वाले के नाम से भी जाना जाता है।

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