सतना में खटारा एंबुलेंस बनी जानलेवा, अस्पताल पहुंचने पर नहीं खुला दरवाजा, मरीज ने तोड़ा दम
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/stna-ambulance-patient-S-215463-1769340483196_m.webpसतना जिला अस्पताल में एंबुलेंस का दरवाजा खोलने का प्रयास करता कर्मी।
डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने मानवता को झकझोर दिया। 108 एंबुलेंस, जिसे ‘जीवनदायिनी’ कहा जाता है, तकनीकी खराबी और खराब रखरखाव के कारण एक गंभीर मरीज के लिए काल बन गई।
दरवाजा जाम, मरीज कैद
दरअसल, रामनगर क्षेत्र से हार्ट अटैक के शिकार मरीज राम प्रसाद को 108 एंबुलेंस अस्पताल ले आई थी। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसे तुरंत आपातकालीन इलाज की आवश्यकता थी। लेकिन जैसे ही वाहन अस्पताल की दहलीज पर रुका, एंबुलेंस का पिछला दरवाजा जाम हो गया।
काफी प्रयासों के बावजूद दरवाजा नहीं खुला और मरीज तथा उसके दो परिजन वाहन के अंदर ही कैद हो गए।
ड्राइवर ने खिड़की से घुसकर तोड़ा लॉक
मरीज की बिगड़ती हालत और परिजनों की चीख-पुकार के बीच एंबुलेंस चालक ने सूझबूझ और फुर्ती दिखाई। उसने ड्राइवर साइड की खिड़की से एंबुलेंस के अंदर प्रवेश कर लॉक तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन इस प्रक्रिया में बहुत समय बर्बाद हो गया। हार्ट अटैक के मरीज के लिए यह समय बेहद कीमती था।
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मरीज की मौत और सवालों के घेरे में व्यवस्था
एंबुलेंस में तकनीकी खराबी के कारण हुई इस देरी का खामियाजा राम प्रसाद को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस सही स्थिति में होती और दरवाजा तुरंत खुल जाता, तो समय पर इलाज संभव होता और इस तरह शायद मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
इस घटना ने एक बार फिर जिले की 108 एंबुलेंस सेवाओं के रखरखाव और फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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