विश्वविद्यालयों मे कर्पूरी ठाकुर चेयर की स्थापना की आवश्यकता, तभी उनके विचारों को और गहराई से जान सकेगी युवा पीढ़ी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/Allahabad-University-Seminar-1769341416203_m.webpप्रयागराज में आयोजित सेमिनार में विश्वविद्यालयों में कर्पुरी ठाकुर चेयर की स्थापना के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती समारोह पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार का दूसरा दिन रविवार को रहा। मुंगेर यूनिवर्सिटी,सेंट्रल यूनिवर्सिटी साउथ विहार गया, इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालय के शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों नें अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।आनलाइन प्रजेंटेशन भी कराया गया।
रविवार के सत्र में चेयरपर्सन के रुप प्रो. रंजन लता गोरखपुर विश्वविद्यालय नें कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर के अंदर समन्वय की विशेष क्षमता थी। समाज के अंदर जो भी उपेक्षित पीडि़त थे, उन सबको लेकर उनके अंदर दर्द था। जो कुछ फैसले उन्होंने इनके हितों को लेकर लिए वह वह मानव की गरिमा उसके सम्मान के लिए किया।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. प्रमोद शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की सादगी, ईमानदारी सामाजिक न्याय के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदम बेमिशान हैं। स्वतंत्रता के आंदोलन में उनकी भूमिका, बाइस महीने की उनकी जेल की यात्रा, किसान आंदोलन में उनकी भूमिका, कृषि, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सुरक्षा आदि विषयों पर उनके विचारों को और गहराई से जानना जरूरी है। इसके लिए उनके नाम से विश्वविद्यालयों में कर्पूरी ठाकुर चेयर की स्थापना की जाए। इससे सही मायने में युवा पीढियों को संघर्ष, ईमानदारी, राजनीति सेवा आदि विषयों पर मार्गदर्शन करेगी।
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर नरेंद्र कुमार नें किया। इस अवसर पर प्रो.अनिल कुमार शुक्ला, डॉक्टर दशरथ शर्मा, डॉक्टर मनोज कुमार, डॉक्टर कमल कृष्ण राय, डॉक्टर दीपांजली पांडेय, डॉक्टर मनीषा शर्मा, डॉक्टर अमित शर्मा सहित अन्य प्राध्यापक एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
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