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चंडीगढ़ की सड़कों से कचरा किया साफ, स्वच्छता में बेहतरीन योगदान के लिए रिटायर्ड DIG इंदरजीत सिंह को पद्मश्री

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रिटायर्ड डीआईजी 88 साल वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू।



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़।पंजाब पुलिस के रिटायर्ड डीआईजी 88 साल वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू चंडीगढ़ को साफ-सुधरा रखने में अहम योगदान दे रहे हैं। यहां तक कि रोजाना सेक्टर-49 की सड़कों पर खुद झाडू लगाते हैं। स्वच्छता में उनके इस बेहतरीन योगदान के लिए गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से नवाजा जाएगा।

पूर्व डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू अपनी अनोखी सामाजिक सेवा के कारण देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। पुलिस सेवा से 1996 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने समाज के लिए काम करना नहीं छोड़ा और बीते तीन-चार वर्षों से वह रोजाना सड़कों पर झाड़ू लगाकर और कूड़ा बीनकर स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं।

इससे पहले पिछले साल स्वतंत्रत दिवस के मौके पर यूटी प्रशासन भी सिद्धू को सम्मानित कर चुकी है । 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित इन सम्मानों को राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु राष्ट्रपति भवन में प्रदान करेंगी।

इंदरजीत सिंह सिद्धू का वीडियो पिछले साल इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह सुबह-सुबह सेक्टर-49 और आसपास के इलाकों में कूड़ा उठाते नजर आए। उम्र और ओहदे की परवाह किए बिना उन्होंने यह साबित कर दिया कि समाज सेवा के लिए किसी पद या पहचान की जरूरत नहीं होती।

उनका कहना है कि चंडीगढ़ को सिटी ब्यूटीफुल कहा जाता है, लेकिन जब पढ़े-लिखे लोग भी सड़कों पर कूड़ा फेंकते हैं तो दुख होता है। इसी पीड़ा ने सफाई को उनके जीवन का मिशन बना दिया। वह पिछले चार सालों से अकेले ही सफाई करते है।
अहम पदों पर रहे सिद्धू

इंदरजीत सिंह सिद्धू पंजाब पुलिस में आतंकवाद के दौर में अमृतसर में एसपी सिटी जैसे अहम पदों पर तैनात रहे। वह मूल रूप से पंजाब के संगरूर जिले के रहने वाले हैं और 1986 में चंडीगढ़ आए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनका बेटा विदेश में बस गया, पत्नी का निधन हो चुका है, लेकिन उन्होंने अकेले ही समाज के लिए एक नई मिसाल कायम की।

उनका कहना है कि जब तक शरीर साथ देगा, वे यह काम करते रहेंगे।मालूम हो कि इससे पहले साल 2020 पद्मश्री चंडीगढ़ से लंगर बाबा से मशहूर जगदीश लाल अहूजा को मिला था उसके बाद अब यह सम्मान इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिला है। सिद्धू सेक्टर-49 की आईएएस सोसाइटी में रहते हैं। वह सुबह 5 बजे उठते हैं और घर से निकलकर कूड़ा उठाने लगते हैं।

वह सेक्टर 49 में अपनी सोसाइटी और आसपास साफ-सफाई करते हैं। सड़कों पर या मैदान में जहां भी उन्हें कूड़ा दिखता है वह उसे उठाते हैं और किसी कट्टे में इकट्ठा कर या रेहड़ी में डालकर ले जाते हैं। इंदरजीत सिंह सिद्धू का कहना कि, जब तक शरीर साथ देता रहेगा। ये काम वह करते रहेंगे।
यहां से अभियान चलाने की मिली प्रेरणा

उनका कहना है कि लोग कूड़ा फैलाते हैं तो मैं उसे उठाकर अपने थैले में रख लेता हूं। इंदरजीत सिंह कहते हैं कि मेरे मन मैं बहुत पहले से था कि मैं यह शुरुआत करूं। लेकिन मुझे प्रेरणा अमेरिका से मिली। दरअसल, मैं एक बार अमेरिका गया था। मैं लड़के के साथ कार में जा रहा था। तभी मैंने अपने हाथ में मौजूद कागज खिड़की से बाहर फेंकना चाहा। लेकिन तभी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।

इंदरजीत सिंह कहते हैं कि वह लड़का मेरी बहुत इज्जत करता है और इसने मेरा हाथ पकड़ लिया क्योंकि मैं गलत काम कर रहा था। ऐसा भारत में भी तो हो सकता है। हमें कूड़ा फैलाने से रोकना चाहिए और अगर लोग नहीं रुकते तो वह कचरा हमें खुद उठना चाहिए।
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