7 अध्यापकों के अनियमित भुगतान में 3 खंड शिक्षाधिकारियों पर कार्रवाई अटकी, जांच में उलझा मामला
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/Action-on-BEO-Stalled-1769350487639_m.webpअनियमित भुगतान मामले की जांच में उलझ जाने के कारण बीईओ पर कार्रवाई रुक गई है।
राज्य ब्यूरो, जागरण, प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के रामपुर जिले के सात अध्यापकों के त्रुटिपूर्ण वेतन एवं अवशेष के रूप में 42 लाख रुपये अनियमित भुगतान किए जाने की शिकायत के मामले में तीन खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) दोषी पाए गए हैं। इसमें अनियमित भुगतान की वसूली किए जाने की रिपोर्ट को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत मानकर वित्त नियंत्रक की जांच के आधार पर अनुशासनिक कार्यवाही निर्मित कर प्रकरण की जांच के लिए अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम पाल ने वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी शिक्षा निदेशालय (बेसिक) प्रयागराज पायल सिंह को पदेन जांच अधिकारी नामित किया।
वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी ने पत्र लिखा है कि मामले में वित्त एवं लेखाधिकारियों की जांच कर आख्या महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजी जा चुकी है। ऐसे में अनुशासनिक कार्यवाही की जांच के लिए सक्षम स्तर के विभागीय अधिकारी को नामित किया जाना उपयुक्त होगा।
शिकायत के इस मामले में जांच अधिकारी मदनलाल ने रिपोर्ट में लिखा है कि त्रुटिपूर्ण वेतन एवं अवशेष के रूप में किए गए अनियमित भुगतान के लिए प्रथम दृष्टया संबंधित विकासखंडों के बीईओ दोषी हैं। क्योंकि, इनके द्वारा प्रेषित इनपुट रिपोर्ट के आधार पर ही वेतन का भुगतान वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा द्वारा किया गया।
जांच अधिकारी ने बीएसए की भूमिका को ठीक नहीं माना है। तीनों खंड शिक्षाधिकारी वर्तमान में क्रमश: बिजनौर, पीलीभीत और गौतमबुद्धनगर में तैनात हैं। मामले में सहायक शिक्षा निदेशक (सेवा-2) शिक्षा निदेशालय डा. ब्रजेश मिश्र ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए दोषी बीईओ से अनियमित भुगतान की वसूली किए जाने के लिए लिखा।
इस पर अपर निदेशक ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन ए ं अपील नियमावली 1999 के नियम के अंतर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित कर जांच अधिकारी नामित किया। अब जांच अधिकारी द्वारा सक्षम अधिकारी को नामित किए जाने का पत्र लिखे जाने के बाद इसमें नए जांच अधिकारी नामित होने हैं। इस मामले की शिकायत उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ रामपुर की ओर से 2019 में की गई थी, जिसमें जांच आख्या 2023 में प्रस्तुत की गई। उसके बाद से कार्रवाई किए जाने की फाइल चल रही है।
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