cy520520 Publish time 1 hour(s) ago

UP का एक ऐसा गांव, जहां हर घर से निकलते हैं सेना के जवान; सैकड़ों बेटे कर रहे देश की सेवा

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/25/article/image/Banda-news-1769345951993_m.webp



बलराम सेंगर, जागरण बांदा। जिले की फतेहपुर सीमा से सटे यमुना नदी के किनारे बसे बेंदा और जौहरपुर करीब 15-15 हजार आबादी वाले गांव जो कि मजरों में बसे हैं। बेंदा में 42 व जौहरपुर में 28 मजरे हैं। यह दोनों जिले के ऐसे गांव हैं, जहां से सबसे ज्यादा युवा देश के लिए सैनिक बन सेवा कर रहे हैं।

भारत-पाकिस्तान के पहले युद्ध (1947-48) में छह फरवरी 1948 को सैनिक केदार सिंह व 1971 के युद्ध में जौहरपुर के बलिदानी सैनिक सूरज पाल सिंह यहां के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं। यहां के लगभग हर घर से एक सदस्य देश सेवा की तैयारी केे लिए प्रतिदिन सुबह से दौड़ लगाने के साथ लंबी कूद, ऊंची कूद आदि में लग जाते हैं। इस क्षेत्र में देश सेवा के प्रति अटूट निष्ठा है। हर बच्चा देश सेवा में जाने के लिए लालायित रहता है।

माता-पिता को फक्र होता है कि उनका बेटा देश सेवा कर रहा है। सेना में भर्ती होना यहां के युवाओं की पहली पसंद आज भी बनी हुई है। हालही में बेंदा व जौहरपुर के आधा दर्जन युवा सेना में भर्ती हुए हैं। उनके माता-पिता अपने आप को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें- एक सबूत पर्याप्त, SIR में जो BLO तीन साक्ष्य मांगे उसका बनाएं वीडियो : शिवपाल सिंह यादव

बुंदेलखंड को वीरों की धरती कहा जाता है। बांदा का इतिहास ही वीरता और संघर्ष भरा रहा है। यह क्षेत्र ही वीरता और शौर्य के लिए जाना जाता है। बांदा ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बांदा भी बुंदेलखंड का मुख्य क्षेत्र है। बांदा जिले की सीमाएं जिनमें महोबा, चित्रकूट, हमीरपुर व फतेहपुर शामिल हैं। वीरता की कहानी में रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी से कोई भी अनजान नहीं है।

अंग्रेजी शासन के खिलाफ बांदा के बहादुर शाह ने रानी लक्ष्मीबाई का साथ दिया और संघर्ष किया था। बांदा से महाराणा छत्रसाल के अलावा आल्हा व ऊदल जैसे प्रसिद्ध बुंदेलखंडी वीर योद्धाओं का संबंध है। जिनकी कहानियां बुंदेलखंड की संस्कृति व इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।


देश की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। बेटा हाल ही में सेना में गया है। उनके परिवार से अन्य भी सेना में हैं। बेटा देश की सेवा करे यही कामना है। यहां पर वीरों की कमी नहीं है। हर युवा देश सेवा के लिए प्रतिदिन सुबह से ही तैयारी में जुट जाता है। -जयपाल सिंह, बेंदा

गांव के युवाओं में बड़ा उत्साह है सेना में जाने के लिए, युवा काफी मेहनत करते हैं। यहीं कारण है कि सेना में सर्वाधिक युवा हमारे गांव से हैं। -रुद्र प्रताप सिंह, बेंदा

देश सेवा के लिए हमेशा से ही सोंचा है, जब वह छोटे थे उनके घर में हमेशा गांव के बलिदानियों के बारे में चर्चाएं होती रहती थीं। उनके घर वाले भी कहते हैं देश सेवा कर लिया तो जीवन सफल है। -काली प्रसाद, जौहरपुर

पने वतन के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों के बारे में बचपन से प्रेरित रहा। जब वह कक्षा दो में था तो अपने शिक्षक से पूछा था कि सैनिक कैसे बनते हैं। वह सैनिक बन देश की आन बान शान के लिए सब कुछ कर सकने को तैयार हैं। -अमन, जौहरपुर
Pages: [1]
View full version: UP का एक ऐसा गांव, जहां हर घर से निकलते हैं सेना के जवान; सैकड़ों बेटे कर रहे देश की सेवा

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com