Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी के दिन करें तुलसी के उपाय, शुरू होंगे खुशियों से भरे दिन
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/26/article/image/Jaya-Ekadashi-2026-1769402722645_m.webpJaya Ekadashi 2026: तुलसी के उपाय से चमकेगी किस्मत (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी (Jaya Ekadashi 2026) को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन साधक भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक-अर्चना करते हैं और जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। इस बार 29 जनवरी को जया एकादशी व्रत किया जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जया एकादशी व्रत को करने से साधक के सभी पापों का नाश होता है और श्रीहरि की कृपा बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि जया एकादशी के दिन तुलसी (Tulsi ke Upay) के उपाय करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है और साधक की तकदीर बदल सकती है। अगर आप भी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो जया एकादशी के दिन इस आर्टिकल में बताए गए तुलसी के उपाय जरूर करें। इससे जल्द ही आपको शुभ परिणाम मिलेंगे।
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आर्थिक तंगी होगी दूर
अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो जया एकादशी के दिन तुलसी के पास देसी घी का दीपक जलाएं और पौधे की 7 या 11 परिक्रमा लगाएं। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है और धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही अन्न-धन के भंडार खाली नहीं होते हैं।
नहीं होगी धन की कमी
धन की प्राप्ति के लिए जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें। प्रभु को तुलसी की मंजरी अर्पित करें। इस दौरान मंत्रों का जप करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
भोग में जरूर शामिल करें तुलसी के पत्ते
अगर आप भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी के पत्ते शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि तुलसी के पत्ते अर्पित करने से प्रभु भोग को स्वीकार करते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
तुलसी जी के मंत्र -
महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी गायत्री -
ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।
तुलसी स्तुति मंत्र -
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
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