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ऑपरेशन सिंदूर की झलक देख दर्शकों का जोश हुआ हाई, कर्तव्य पथ पर खास रही सेना की ये झांकी

भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मना रहा है। वहीं राजधानी दिल्ली का कर्तव्य पथ भारत की अटूट सैन्य शक्ति, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास की नई इबारत का गवाह बना। इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह भारत की रणनीतिक जीत के प्रदर्शन के लिए भी याद रखा जाएगा। वहीं इस परेड में कर्तव्य पथ पर एक झांकी की बहुत चर्चा रही, वह झांकी है \“ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस\“



\“ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस\“



\“ऑपरेशन सिंदूर: विक्ट्री थ्रू जॉइंटनेस\“ झांकी में मिसाइलों, टैंकों और एक इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर के मॉडल दिखाए गए। इसके जरिए यह बताया गया कि भारत की सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर तेज़ और प्रभावी सैन्य कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम हैं। कर्तव्य पथ पर चलते हुए इस झांकी ने दिखाया कि पिछले साल मई में शुरू किए गए इस ऑपरेशन के दौरान तीनों सेनाओं ने कैसे एक साथ तालमेल बनाकर काम किया। यह झांकी बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की तैयारी और ताकत का साफ संदेश देती नजर आई। इस परेड के दौरान द्रौपदी मुर्मू ने सलामी ली। इस मौके पर एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद रहीं। परेड में मौजूद राजनीतिक और सैन्य नेताओं ने भारत की संयुक्त सैन्य ताकत का यह दुर्लभ सार्वजनिक प्रदर्शन देखा।




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इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर रहा झांकी का केंद्र



ऑपरेशन सिंदूर की झांकी के बीच में एक कांच के बॉक्स में रखा गया इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल कमांड सेंटर सबसे खास आकर्षण रहा। इसके जरिए दिखाया गया कि कैसे रियल-टाइम निगरानी, लक्ष्य तय करना और मिशन को अंजाम देना एक साथ किया जाता है। बड़े डिजिटल स्क्रीन पर यह भी बताया गया कि उपग्रहों, ड्रोन और रडार सिस्टम से मिलने वाली जानकारी को कैसे जोड़ा जाता है, ताकि दुश्मन पर सटीक हमला किया जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत बचाव किया जा सके।



झांकी में ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और S-400 की प्रतिकृतियां भी दिखाई गईं। ये भारत की गहरी मारक क्षमता और मजबूत एयर डिफेंस को दर्शाती हैं। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने कहा कि यह झांकी साफ तौर पर दिखाती है कि भविष्य की जंग तकनीक, रियल-टाइम जानकारी और तीनों सेनाओं के बेहतरीन तालमेल के साथ लड़ी जाएगी।



ऑपरेशन सिंदूर बनी मिसाल



ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई की सुबह हुई थी। यह कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई, जिसमें दो दर्जन से ज्यादा पर्यटकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों पर मिलकर हमले किए। इसके बाद दोनों देशों के बीच करीब चार दिन तक सैन्य तनाव बना रहा।



इस दौरान पाकिस्तान ने भारतीय शहरों पर मिसाइल हमले करने की कोशिश की, लेकिन भारत की मजबूत और बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, 10 मई को पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों ने संघर्ष विराम की मांग की, जिसके बाद दोनों तरफ से सैन्य कार्रवाई रोक दी गई।



इन हथियारों को दिखा जलवा



झांकी में कई सैन्य हथियारों और प्रणालियों के स्केल मॉडल दिखाए गए। इनमें सटीक हमलों के लिए ब्रह्मोस मिसाइल, हवाई सुरक्षा के लिए आकाश और MRSAM सिस्टम शामिल थे। इसके अलावा सूर्यास्त्र, T-90 भीष्म, अर्जुन टैंक और नाग मिसाइल सिस्टम Mk-2 भी प्रदर्शित किए गए। इन सभी मॉडलों को इस तरह सजाया गया था कि एक असली युद्धक्षेत्र जैसा दृश्य बने। इसमें टोही, हमला और इलाके पर नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया को क्रमवार दिखाया गया।



तीनों सेनाओं का तालमेल



झांकी के बाद एक चरणबद्ध युद्ध संरचना दिखाई गई, जिससे ऑपरेशन सिंदूर का संदेश केवल स्थिर प्रदर्शन तक सीमित न रहकर वास्तविक कार्रवाई जैसा नजर आया। इस दौरान सेना के बख्तरबंद और मशीनीकृत वाहन आगे बढ़े और उन्होंने ध्रुव हेलीकॉप्टर और रुद्र हेलीकॉप्टर के साथ तालमेल दिखाया। वहीं अपाचे और प्रचंड हेलीकॉप्टरों ने नजदीकी हवाई सहायता का प्रदर्शन किया। आसमान में राफेल, Su-30 MKI और MiG-29 लड़ाकू विमानों की उड़ान ने यह दिखाया कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने हवाई बढ़त कैसे हासिल की थी। एक परेड अधिकारी ने कहा कि यह पहली बार है जब आम लोगों ने इतने साफ तौर पर देखा कि सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर एक ही ताकत के रूप में कैसे काम करती हैं।
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