cy520520 Publish time 2026-1-26 19:56:32

Bihar News : जब मैथिली में गूंजा वंदे मातरम्, मिथिला ने गाया राष्ट्रप्रेम

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डा. सुष्मिता झा । जागरण



जागरण संवाददाता, दरभंगा । गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबे देश ने इस बार राष्ट्रभक्ति को सुना भी और महसूस किया। जब वंदे मातरम् मैथिली भाषा के मधुर स्वरों में गूंजा, तो ऐसा लगा मानो मिथिला की मिट्टी खुद राष्ट्रप्रेम गा रही हो।

यह प्रस्तुति के साथ भारत की भाषायी विविधता और सांस्कृतिक आत्मा का सजीव उत्सव था। सोमवार को जब पूरा देश गणतंत्र दिवस के उल्लास में डूबा रहा, उसी वक्त मिथिला की धरती से राष्ट्रभक्ति का एक अनोखा और भावनात्मक स्वर गूंज उठा। पहली बार लोगों ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को मैथिली भाषा में मधुर स्वर में सुना, जिसने हर श्रोता को गर्व और भावुकता से भर दिया।

प्रख्यात कवि एवं साहित्यकार अरविंद नीरज द्वारा किए गए मैथिली अनुवाद को संगीत की आत्मा में ढालने का अद्भुत कार्य मधुबनी जिले के सरिसबपाही निवासी, संगीत में पीएचडी कर चुकीं डॉ. सुष्मिता झा ने किया।

उनकी स्वर-रचना और गायन ने मिथिला की सांगीतिक शैली में वंदे मातरम् को इस तरह प्रस्तुत किया कि राष्ट्रभक्ति एक नए भाव और नई संवेदना के साथ सामने आई। यह प्रस्तुति केवल एक गीत नहीं, बल्कि भाषायी विविधता, सांस्कृतिक एकता और मातृभाषा के सम्मान का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी।

गणतांत्रिक मूल्यों—एकता, बहुलता और समावेशन—को संगीत के माध्यम से सशक्त अभिव्यक्ति मिली। अनुवाद में राष्ट्रगीत की गरिमा, भावनात्मक ऊँचाई और मूल आत्मा को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया, जिसने इसे आम जनमानस से गहराई से जोड़ा।

गणतंत्र दिवस पर प्रस्तुत यह मैथिली वंदे मातरम् यह याद दिलाता है कि भारत की असली ताकत उसकी भाषाओं, संस्कृतियों और रचनात्मक अभिव्यक्तियों में बसती है। यह प्रस्तुति श्रोताओं के लिए एक अविस्मरणीय और प्रेरक अनुभव बन गई।
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