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भारतीयों स्मार्टफोन पर बिताए 1.1 लाख करोड़ घंटे, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स को बड़ा फायदा


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जब आप मेट्रो, बस या किसी रेस्टोरेंट में परिवार के साथ बैठे लोगों को देखते हैं, तो क्या नजर आता है? अधिकतर लोग अपनेस्मार्टफोनमें व्यस्त होते हैं. भारत में इंटरनेट की तेज़ी से बढ़ती पैठ और सस्ते डेटा के चलते, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. हालांकि कुछ लोग आर्थिक मंदी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं, लेकिन स्मार्टफोन उपयोगकर्तासोशल मीडियाइन्फ्लुएंसर और ऑनलाइन बिजनेस को जबरदस्त फायदा पहुंचा रहे हैं.नए आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों ने 2024 में कुल 1.1 लाख करोड़ घंटे अपने स्मार्टफोन स्क्रीन पर बिताए. EY की एक रिपोर्ट बताती है कि देश में सस्ता इंटरनेट उपलब्ध होने के कारणइंस्टाग्रामसे लेकरनेटफ्लिक्सतक, हर प्लेटफॉर्म तक लोगों की पहुंच बढ़ी है.रिपोर्ट के अनुसार, औसतन हर भारतीय रोजाना 5 घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिताता है, जिसमें 70% समय सोशल मीडिया, गेमिंग और वीडियो देखने में जाता है. इसके चलते डिजिटल मीडिया भारत के 2.5 लाख करोड़ रुपये के मनोरंजन उद्योग का सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है, जिसने पहली बार टेलीविजन को भी पीछे छोड़ दिया है.सोशल मीडिया अब केवल स्क्रॉलिंग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक नया शॉपिंग मॉल बन चुका है. कंपनियां अब पारंपरिक विज्ञापन के बजाय डिजिटल मार्केटिंग पर ज़्यादा ध्यान दे रही हैं.बिग बैंग सोशल के सीईओ सुदीप सुभाष का कहना है, "चूंकि लोग ज्यादा समय सोशल मीडिया, वीडियो और गेमिंग में बिता रहे हैं, ब्रांड्स अब बिलबोर्ड और टीवी ऐड्स की बजाय डिजिटल कैंपेन पर निवेश कर रहे हैं, जिससे ग्राहक सीधा इंटरैक्ट कर सकें."भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा उपभोक्ता बन चुका है. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, सितंबर 2024 तक भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसतन 21.2GB डेटा का मासिक उपभोग हो रहा था. वहीं, 5G उपयोगकर्ताओं के लिए यह आंकड़ा 40GB तक पहुंच चुका है. टेलीकॉम कंपनियों का अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में भारत में 5G उपभोक्ताओं की संख्या 77 करोड़ तक पहुंच सकती है.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों भारतीय कंटेंट क्रिएटर छोटे वीडियो और व्लॉग्स बनाकर मोटी कमाई कर रहे हैं. भारत सरकार ने इस उभरते सेक्टर को समर्थन देने के लिए $1 बिलियन (करीब 8,000 करोड़ रुपये) का फंड भी लॉन्च किया है.वहीं, ई-कॉमर्स कंपनियां लगातार स्मार्टफोन स्क्रीन पर विज्ञापन बाढ़ की तरह चला रही हैं, जिससे उपभोक्ता अनजाने में ही शॉपिंग करने लगते हैं. इसके अलावा, राजनीतिक दल भी सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर प्रचार कर रहे हैं, जिससे डिजिटल माध्यमों का प्रभाव चुनावों में भी देखा जा रहा है.मोदी सरकार के 〷क इन इंडिया✩भियान के तहत स्मार्टफोन उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई है. भारत ने 2014-15 में अपनी जरूरत का सिर्फ 25% मोबाइल फोन घरेलू स्तर पर बनाया था, जबकि 2024 तक यह आंकड़ा 97% तक पहुंच चुका है.Apple, Vivo और Xiaomi जैसी कंपनियां अब भारत में न केवल स्थानीय जरूरतों के लिए उत्पादन कर रही हैं, बल्कि निर्यात के लिए भी फैक्ट्रियां लगा रही हैं. 2024 में भारत का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग उद्योग 4.1 लाख करोड़ रुपये ($49.27 बिलियन) के स्तर पर पहुंच चुका है.जैसे-जैसे स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या हम डिजिटल स्क्रीन पर ज़रूरत से ज़्यादा समय बिता रहे हैं? नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ❋y Now! The Shopping Conspiracy✩े इस पर रोशनी डाली है कि कैसे कंपनियां उपभोक्ताओं को ज़रूरत से ज़्यादा खरीदारी के लिए प्रेरित कर रही हैं.AI और मशीन लर्निंग की मदद से अब कंपनियां हमारी ऑनलाइन आदतों को ट्रैक कर रही हैं और हमारे लिए 〹लेटेड ऐड्स✩ेश कर रही हैं. कंपनियां सिर्फ उत्पाद नहीं बेच रही हैं, बल्कि शॉर्ट वीडियो, लाइव स्ट्रीम और इंटरैक्टिव विज्ञापनों के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं.भारत में डिजिटल क्रांति अपने चरम पर है. सस्ता इंटरनेट, 5G तकनीक, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव ने देश को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल बाज़ार बना दिया है. स्मार्टफोन हमारी ज़िन्दगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन क्या हम सच में इस बदलाव के प्रभाव को समझ रहे हैं? यह सवाल हम सभी को खुद से पूछना चाहिए.(अस्वीकरण: विशेषज्ञों द्वारा दी गई सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं. ये इकोनॉमिक टाइम्स हिन्दी के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं)
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