deltin55 Publish time 2026-2-1 01:14:36

भारतीय पासपोर्ट अब मेरे जीवन में किसी काम का नहीं... लंदन से भारत के टेक प्रोफेशनल का छलका दर्द


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लंदन: भारत के रहने वाले एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने अपने भारतीय पासपोर्ट को लेकर निराशा जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया है कि हर इंटरनेशनल ट्रिप के लिए उन्हें बहुत सारे कागजात की जरूरत पड़ती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई एक पोस्ट में कुणाल कुशवाहा ने कहा कि भारतीय पासपोर्ट अब उनकी ज़िंदगी में "कोई वैल्यू नहीं जोड़ता"। कुणाल कुशवाहा भारतीय पासपोर्ट को लेकर निराश नजर आ रहे हैं। कुणाल के मुताबिक, पासपोर्ट होने के बावजूद यात्रा के दौरान कई तरह की बाधाएं होती है, जिसे देखते हुए लोग यात्रा ना करना ज्यादा बेहतर विकल्प मानते हैं।कुनाल ने बताया कि वह अपने दोस्त के जन्मदिन पर आयरलैंड जाना चाहते थे, लेकिन ऐसा कर नहीं सके। उन्होंने दावा किया, "मेरा सबसे अच्छा दोस्त आयरलैंड में रहता है। हाल ही में उसका जन्मदिन था। आम तौर पर मैं टिकट बुक करके उसे सरप्राइज देता। लेकिन, इसके बजाय मैंने वीजा वेबसाइट खोलीं।" आयरलैंड न जा पाने की वजह यह थी कि जर्मनी की हाल की यात्रा के कारण शेंगेन नियमों के तहत उन्हें मिलने जरूरी दिनों की संख्या कम हो गई थी।भारतीय पासपोर्ट से क्यों निराश हुए टेक प्रोफेशनल?कुशवाहा ने कहा, "मैं कुछ दिन पहले ही बर्लिन में था। उस एक छोटी सी बात की वजह से मैं क्रिसमस पर डबलिन में अपने दोस्तों के साथ शामिल नहीं हो सका, पैसे की वजह से नहीं, समय की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि मेरे पास दूसरे वीजा के लिए अप्लाई करने के लिए पर्याप्त दिन नहीं बचे थे।" उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ उनके साथ नहीं होता, बल्कि हजारों भारतीय पासपोर्ट धारकों के साथ ऐसा होता है। उन्होंने कहा कि "मैं एयरपोर्ट पर लंबी कतारों में खड़ा रहा हूं, दूसरों को आसानी से जाते हुए देख रहा हूं, जबकि मैं उन डॉक्यूमेंट्स के फोल्डर निकालता हूं जिन्हें मैं पहले ही कई बार जमा कर चुका हूं।" उन्होंने कहा कि "शेंगेन एप्लीकेशन एक फुल-टाइम नौकरी जैसा लगता है, जिसमें बैंक स्टेटमेंट, कवर लेटर, बुकिंग देना होता है, वो भी सिर्फ एक सामान्य यात्रा के लिए।"आपको बता दें कि शेंगेन वीजा एक ऐसा वीजा होता है जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति यूरोप के शेंगेन क्षेत्र में शामिल कई देशों में एक ही वीजा पर यात्रा कर सकता है। इसके अलावा कुशवाहा ने भारत के बैंकिंग सिस्टम को भी पुराना बताया। उन्होंने कहा, "घर पर बैंकिंग और KYC अभी भी पुराने दशक में अटके हुए लगते हैं। अंतहीन कागजी कार्रवाई। देरी। फॉलो-अप। चक्कर लगाना। दोबारा सबमिट करना।" लंदन में रहने वाले इस प्रोफेशनल ने यह कहते हुए अपनी बात खत्म की कि उनकी पोस्ट देशभक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि "परेशानी" के बारे में है। उन्होंने लिखा, "यह परेशानी के बारे में है। इस बारे में कि जब आप ग्लोबली काम करते हैं लेकिन आपके पास ऐसा पासपोर्ट होता है जो समय और दिमागी क्षमता को सीमित करता है, तो जिंदगी कितनी मुश्किल हो जाती है।" उन्होंने कहा कि "राष्ट्रीय गौरव ग्लोबल मोबिलिटी का विकल्प नहीं है।"
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